मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक कामधेनु योजना के गति पकड़ने में जिले में तमाम बाधाएं आ रही हैं। इसमें अभी तक बैंक की ओर से लोन स्वीकृत करने में देरी करने की शिकायतों की जिक्र अक्सर होता रहता है, जिनमें अधिकांश मामलों में शाखा प्रबंधकों की लेटलतीफी, कमीशनबाजी और अन्य कई तरह के लालच सामने आते रहते हैं। इसके साथ ही योजना में लाभार्थियों की ओर से तमाम मामलों में कमी रहने की वजह से योजना सही ढंग से गति नहीं पकड़ पा रही है।
जिले में कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना के 104 लोगों ने आवेदन किया था। इसमें 39 लोगों की डेयरियां स्वीकृत हो गईं, जबकि 34 लाभार्थियों का काम पेेंडिंग में चल रहा है। 28 लाभार्थियों को प्रपत्र उपलब्ध न कराने की वजह से मना कर दिया गया था और तीन लाभार्थियों की सूचना मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा बैंकों को नहीं भेजी गई। इसमें जिन 28 लाभार्थियों को वापस किया गया, उनमें अधिकांश के पास मार्जिन मनी नहीं थी। साथ ही बैंक से कर्ज लेने के लिए सिक्योरिटी के रूप में दी जाने वाले जमीन या अन्य प्रपत्र नहीं थे। यहां बताना जरूरी है कि जिस भूमि पर वे लोग कामधेनु डेयरी योजना खोलना चाहते थे। उनमें से अधिकांश लोगों की जमीन कृषि कार्य के लिए आवंटित थी। इसलिए उस पर डेयरी नहीं खोली जा सकती। ऐसी जमीनों को गैर कृषि भूमि कराने में डेयरी संचालकों को परेशानी का सामना करने के साथ ही देर भी हो रही है। बैंकों की इन मजबूरियों की वजह से काम करने से कामधेनु योजना के संचालन में दिक्कत हो रही है।
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बैंकों द्वारा लोन स्वीकृत हो जाने के बाद मार्जिन मनी न होने की वजह से ऋण स्वीकृत करने में बैंकों को परेशानी हो रही है। इसलिए कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना के तहत आवेदन करने वालों को मार्जिन मनी इंटरव्यू के दौरान ही लिए जा रहे हैं।
-चारू भट्टाचार्य, अग्रणी जिला प्रबंधक