बदायूं। बालू के अवैध खनन और ओवरलोडिंग से जुड़े माफिया राजस्व का चूना लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। पहले टैक्टर- ट्रॉलियों से बालू ढोया जाता था, लेकिन अब कार्रवाई के बचने के लिए खनन माफिया ने तरीका बदल लिया है। अब बैलगाड़ियों से बालू को ढोया जा रहा है। सहसवान, उझानी और कादरचौक के कई गांव अवैध खनन के लिए पूरी तरह से बदनाम हैं। इसके अलावा पूरे जिले में ओवरलोडिंग का भी खेल जमकर चल रहा है।
जिले में पिछले साल बड़े पैमाने पर बालू खनन का काम चल रहा था, जिस पर तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने सख्ती बरती थी। खनन माफिया पर कार्रवाई होना शुरू हुई तो उनके हौसले पस्त होने शुरू हो गए। बीच में खनन पूरी तरह से बंद सा हो गया था। लेकिन, पिछले तीन माह पहले उसहैत क्षेत्र के गांव अहमदनगर बछौरा में खनन विभाग की तरफ से बालू खनन के लिए परमिट दे दिया गया, जिसके बाद में एक बार फिर माफिया सक्रिय हो गए हैं। सबसे ज्यादा बदनाम कादरचौक के गांव गंगपुर, रैसी नगला, ततारपुर, मामूरगंज, सुंदरायन हैं, जो गंगा किनारे बसे हुए हैं। अफसरों ने अपनी फजीहत से बचने के लिए पिछले दिनों उझानी में छतुइया के पास बालू लदे डनलप-बुग्गियों को पकड़कर कार्रवाई कर दी जो ऐसे स्तर पर हुई कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के धंधेबाजों को बचाने में कारगर ही साबित हुई। अब अफसर कार्रवाई कर तो रहे हैं लेकिन ये केवल औपचारिकता तक सीमित रहने के कारण उनकी मंशा पर भी सवाल खड़ा हो रहे हैं।
पांच साल के लिए दिया गया है पट्टा
खनन विभाग के अनुसार दातागंज क्षेत्र के गांव अहमद नगर बछौरा में एक व्यक्ति के नाम विभाग ने पांच साल का एग्रीमेंट किया है। इसके तहत उन्हें 5.798 हेक्टेयर जगह दी गई है। इसमें हर साल 79 हजार 665 घनमीटर बालू की खुदाई की जा सकती है।
कई सफेदपोश भी हैं इस काले धंधे में शामिल
अवैध खनन के काले धंधे में कई सफेदपोश भी शामिल हैं, जिनकी शह पर इस काम को अंजाम दिया जा रहा है। यह सफेदपोश आर्थिक और राजनीतिक लाभ के लालच में इन खनन माफिया को संरक्षण दिए हुए हैं, जिससे पुलिस और प्रशासन भी इन पर हाथ डालने से कतराता है।
जिले में अहमद नगर बछौरा में ही बालू के खनन के लिए परमिट दिया गया है, इसके अलावा अगर कहीं पर बालू खनन होता है, तो संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनन कहीं नहीं होने दिया जाएगा।
- नरेंद्र सिंह, खनन अधिकारी