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Budaun News: कार्रवाई होने पर ठिकाना बदल लेते हैं अवैध अस्पताल संचालक

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बदायूं। स्वास्थ्य विभाग डीएम के आदेश पर जैसे-तैसे अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई करता है, लेकिन कुछ दिन बंद रखने के बाद संचालक अस्पताल का नाम बदलकर नए ठिकाने पर धंधा शुरू कर देते हैं। उन्हें यह गुरुमंत्र भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार ही देते हैं। यही कारण है कि अवैध अस्पतालों में लगातार जच्चा-बच्चा की मौतों के मामले सामने आ रहे हैं। कार्रवाई होने के बाद आधा दर्जन अस्पताल संचालकों ने ठिकाना बदलकर फिर से अस्पताल संचालित कर लिए हैं।
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अवैध अस्पताल संचालकों का यह खेल खुलेआम चल रहा है। डिग्रीधारी डॉक्टर को अपने अस्पताल का पंजीकरण कराने के लिए औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर महीनों टहलाया जाता है। दरअसल, वे इस गुमान में जिम्मेदारों की मांग पूरी नहीं करते हैं कि उनके पास तो वैध डिग्री है, जबकि अवैध अस्पताल संचालकों का सारा काम खड़े-खड़े हो जाता है। वजीरगंज में बिल्सी रोड पर तीन अक्तूबर को न्यू बदायूं अस्पताल के नाम से संचालित नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी।
स्वास्थ्य विभाग ने पहले तो सिर्फ नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया, लेकिन जब पीड़ित परिवार ने शासनस्तर तक शिकायत की तो जांच की गई। इसमें अस्पताल का पंजीकरण ही फर्जी मिला। इसके बाद संचालक के खिलाफ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। अब संचालक ने नाम बदलकर दूसरी जगह अस्पताल शुरू कर दिया है। शहर के लालपुल स्थित न्यू फैमिली नर्सिंग होम में 21 दिन की बच्ची की मौत होने के बाद अस्पताल संचालक को नोटिस दिया गया। अब दूसरे रजिस्ट्रेशन पर अस्पताल संचालित किया जा रहा है।
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ओरछी के एक निजी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत का मामला खासा चर्चित रहा। अब यह अस्पताल भी दूसरे नाम से संचालित हो रहा है। सहसवान कस्बे में 20 मार्च को जच्चा-बच्चा की मौत होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस तक नहीं दिया। अस्पताल अब संचालित हो रहा है। वहीं सहसवान के एक अन्य अस्पताल में इसी माह दो मार्च को जच्चा-बच्चा की मौत हुई। अब यह अस्पताल नाम और ठिकाना बदलकर संचालित हो रहा है।

जिले में संचालित हैं सैकड़ों अवैध अस्पताल

जिले में बिल्सी, बिसौली, फैजगंज, इस्लामनगर, कादरचौक, अलापुर, बिनावर, कुंवरगांव, बगरैन, वजीरगंज, सैदपुर समेत ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों की संख्या में अवैध अस्पताल संचालित हैं लेकिन दो माह में मात्र दो अस्पतालों के खिलाफ ही स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर सका है, जबकि डीएम सभी अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दे चुके हैं।

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वर्जन
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद सभी निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है। बिना रजिस्ट्रेशन चलने वाले अस्पतालों को चिह्नित भी किया गया है। अगर नाम बदलकर अन्य स्थान पर अस्पताल संचालित होना पाया जाता है तो कठोर कार्रवाई कराई जाएगी। नोडल अधिकारी से भी जवाब तलब किया जाएगा। इस तरह का कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। - डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ
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