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हुक्मरानों की अनदेखी से स्वास्थ्य सेवाओं पर पलीता

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अस्पताल में मरीजों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इसका नमूना शुक्रवार को भी देखने को मिला। इलाज को आसपास इलाके से पहुंचे मरीजों में खासकर महिलाओं को ज्यादा परेशानी हुई। संविदा पर इकलौती महिला चिकित्सक की वजह से भीड़भाड़ अधिक रही, सो ज्यादातर को नंबर के इंतजार में ही वक्त गुजारना पड़ा।
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डॉक्टरों की किल्लत से जूझ रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इस वक्त रमा मनराल और हिना सबदर ही तैनात हैं। संविदा पर तैनात महिला चिकित्सकों में मनराल पर फील्ड का कार्य है तो सबदर को रोजाना पहुंचने वाली करीब एक सौ से अधिक महिला रोगियों का इलाज करना मुश्किल हो जाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ कृति सिंह द्वारा बीआरएस के लिए आवेदन कर वह यहां से जा चुकी हैं। कृति के स्थान के विभागीय स्तर से अभी किसी और को तैनात नहीं किया गया है।
सूत्रों की मानें तो महिला सर्जन के अभाव में सात-आठ महीना से सीजर भी नहीं हो पा रहे हैं। जननी सुरक्षा योजना के तहत उन्हीं प्रसूताओं को भर्ती किया जाता है जिनकी नार्मल डिलीवरी संभव हो। गंभीर दिक्कत होने की सिथति में ज्यादातर को जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। महिलाओं में बरसुआ की प्रेमवती ने बताया कि अब तो मामूली बीमारी की दवा लेने के लिए भी इकलौती डॉक्टर के केबिन के बाहर खड़े रहकर नंबर आने का इंतजार करना पड़ता है।
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मास्टहेड न मोहर, पर्चे वाला कागज सादा
अस्पताल में करीब 25 दिन पहले प्रिंटेड पर्चे खत्म हो गए। चिकित्साधीक्षक विश्वास अग्रवाल को भी पर्चे खत्म होने से अवगत करा दिया गया। शुरूआत में सादा कागज पर अस्पताल की मोहर लगाकर काम शुरू कराया गया। इसी बीच एक दिन मोहर गुम हो गई। पर्चे के नाम पर अजीब संकट पैदा हुआ तो विकल्प के तौर पर सीरियल नंबर डालकर सादा कागज पर मरीज का नाम और उसकी उम्र लिखकर काम चलाया जा रहा है।

एक्स-रे रूम का एक माह से पंखा खराब
मरीज तो एक्स-रे रूम में भी पहुंचते हैं। एक्स-रे मशीन की टेबिल के ऊपर पंखा तो नजर आया लेकिन वह चलता नहीं है। पूछने पर डार्क रूम असिस्टेंट गिरिराज किशोर ने बताया कि पंखा खराब हुए एक महीना हो चुका है। ठीक कराने के लिए कई बार कहा भी गया लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। सबसे ज्यादा दिक्कत से डार्क रूम में तब होती है जब फिल्म की धुलाई के दौरान किबाड़ें और खिड़कियां बंद करनी पड़ती हैं।

...और हैंडपंप ने भी दे दिया जवाब
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज और उनके तीमारदारों के साथ इलाके से आशा कार्यकत्रियां पहुंचती हैं। ऐसा नहीं गर्मी के इन दिनों में उन्हें हलक तर करने को दो बूंद पानी की जरुरत नहीं पड़ती हो। प्यास से व्याकुल भले ही मरीज छटपटाते रहें लेकिन इमरजेंसी के आसपास पीने को पानी नहीं मिलेगा। मुख्यद्वार के पास लगा इंडिया मार्का हैंडपंप कई महीने से खराब पड़ा है।
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