बिल्सी। कछला रोड स्थित माहेश्वरी भवन में श्री रामकृष्ण समिति की ओर से आयोजित श्रीराम कथा में सोमवार को कथावाचक अयोध्यादास रामायणी ने भगवान श्रीराम और केवट संवाद की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि जब भगवान राम, लक्ष्मण, सीता सहित गंगा के किनारे केवट को पार उतारने के लिए कहते हैं तो केवट कहता है हे प्रभु आपके मरम को मैं जानता हूं। जब शिला नारी बन सकती है तो मेरी नाव तो काठ की है। ये छूते ही उड़ जाएगी। मैं इसी से अपना परिवार पालता हूं। इसलिए प्रभु पांव धोकर ही हम नाव पर बैठाएंगे।
भगवान राम केवट का प्रेम देख मुस्कुरा कर बोले- केवट मुझे विलंब हो रहा है। तुम मेरा पैर धो सकते हो। केवट कठौता में गंगाजल भर कर प्रभु का पैर धुलवा कर नाव में बैठाकर गंगा पार कराता है। गंगा पार उतरकर संकोच भरी निगाहों से भगवान श्रीराम सीता से कहते हैं, सीता आपके पास मुद्रिका है, उसे केवट को उतराई के रूप में दे दो।
केवट राम के चरणों में गिरकर याचना करता है और कहता है कि हे नाथ, मुझे कुछ नहीं चाहिए। आपको मैंने गंगा पार कराई है। आप मुझे भवसागर से पार कर देना। हे प्रभु, जब लौटकर आइएगा तो जो आप देंगे, वो प्रसाद के रूप में ग्रहण कर लूंगा। महाराज ने इस दौरान कई अन्य प्रसंगों को भी सुनाया। इस मौके पर नरेन्द्र गरल, सत्यपाल वार्ष्णेय, लोकेश बाबू, मनोज वार्ष्णेय, संजीव वार्ष्णेय, दिनेश बाबू, नीरज माहेश्वरी, डॉ. राजाबाबू, दुर्गेश बाबू, आशीष वशिष्ठ आदि मौजूद रहे।