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खुद को मनवाने का मुझको भी हुनर आता है...

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बदायूं। एक साल की कड़ी मेहनत, इसके बाद परीक्षा और परीक्षा के के बाद परिणामों का सभी को इंतजार था। यूपी बोर्ड परीक्षा हाई स्कूल और इंटर का परीक्षा परिणाम घोषित होने के साथ यह इंतजार खत्म हो गया। हाई स्कूल और इंटर में ज्यादातर टॉपर्स सामान्य परिवारों से आते हैं। किसी के पिता खेती किसानी करते हैं तो किसी टॉपर के पिता ड्राइविंग करते परिवार पालते हैं। इन टॉपर्स पर वसीम बरेलवी की लाइनें खुद को मनवाने का मुझको भी हुनर आता है, मैं वह कतरा हूं समंदर मेरे घर आता है। इन टॉपर्स पर काफी हद तक ठीक बैठती हैं।
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डॉक्टर बनना चाहती हैं हाईस्कूल की टॉपर वैष्णवी
बिसौली। मूल रूप से एटा के शिकोहाबाद निवासी नवल किशोर की बेटी वैष्णवी ने हाई स्कूल परीक्षा में जिले में 93.83 प्रतिशत अंक हासिल कर पहला स्थान प्राप्त किया था। नवल किशोर खेती किसानी करते हैं। परिवार में बेटी वैष्णवी, छवि और बेटा देव प्रताप हैं। नवल किशोर के भाई जसवंत सिंह बिसौली के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में शिक्षक हैं। वैष्णवी यहां माता-पिता से दूर अपने ताऊ के साथ रह कर पढ़ रही थी। वैष्णवी का कहना है कि वह डॉक्टर बन कर लोगों की सेवा करना चाहती हैं। अपनी सफलता का श्रेय वह ताऊ के साथ माता-पिता और गुरुजनों को देती हैं। वैष्णवी का कहना है कि अगर मन लगाकर कोई काम किया जाए तो सफलता निश्चित मिलती है।
नैनसी ने देखा है डॉक्टर बनने का सपना
रुदायन। विद्यावती कन्या इंटर कॉलेज की नैनसी का सपना डॉक्टर बनना है। हाई स्कूल परीक्षा में नैनसी ने 92.50 प्रतिशत अंक पाकर जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। फैजगंज बेहटा क्षेत्र के गांव जखौरा निवासी नैनसी के पिता बलवीर सिंह किसान हैं। उनके पास आठ बीघा जमीन है। नैनसी क्षेत्र के गांव करनपुर में अपनी बुआ के घर रह कर पढ़ाई कर रही हैं। नैनसी को जिले में दूसरा स्थान मिलने पर परिवार के साथ कॉलेज प्रबंधन भी काफी खुश है। नैनसी अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता के साथ बुआ और गुरुजनों को देती हैं। नैनसी का कहना है कि उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है। कॉलेज प्रबंधक शिवकुमार गुप्ता नैनसी की सफलता से काफी खुश हैं।
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प्रहास का इंजीनियर बनने का सपना
बदायूं। श्रीराम सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के छात्र प्रहास ने हाईस्कूल की परीक्षा में 92.17 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में तीसरा स्थान पाया है। बुआ अंजलि के बेटे के एमबीबीएस किया तो प्रहास ने भी इंजीनियर बनने की ठान ली। प्रहास का पसंदीदा विषय गणित है। पिता रुपेंद्र सिंह शिवदेवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में गणित के शिक्षक हैं और मां अर्चना कुमारी गृहणी हैं। प्रहास का कहना है कि जब मन करे तब पढ़ना चाहिए। प्रहास का कहना है कि बोर्ड परीक्षा को लेकर उनके मन में डर तो था, लेकिन उनको अपनी कामयाबी का पूरा भरोसा भी था। प्रहास के बड़े भाई कुशाग्र डीयू से बीएससी कर चुके हैं। दादा वीरेंद्र सिंह राठौर प्रवक्ता थे। प्रहास की सफलता पर परिवार में काफी खुशी है। परीक्षाफल के बाद दादी शांति देवी ने उनको दुलार किया।
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