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Budaun News: बुलेट के लिए विवाहिता की हत्या में पति को दस और सास को सात वर्ष की कैद

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बदायूं। अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश/एफटीसी (महिलाओं के विरुद्ध अपराधों के मामलों की सुनवाई के लिए) नेहा गर्ग की कोर्ट ने बुलेट की मांग पूरी न होने पर विवाहिता को जलाकर मारने व उसके अधजले शव को खेत में गाड़ने के मामले में आरोपी पति हंसराज व सास मुन्नी देवी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने आरोपी पति को दस साल और सास को सात साल की सजा सुनाई। दोनों अभियुक्तों पर 45 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
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ग्राम गुधनी थाना अलापुर निवासी मुन्नालाल ने कादरचौक थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि पुत्री सतानो देवी की शादी हंसराज पुत्र हरीश चंद्र निवासी बरौरा के साथ की थी। शादी में 1.50 लाख रुपये की नकदी, जेवर, कपड़ा, फर्नीचर, एक बाइक सहित अन्य घरेलू सामान दिया था। करीब चार लाख रुपये का दहेज दिया था लेकिन इस दहेज से बेटी के ससुराली खुश नहीं थे। शादी के एक वर्ष बाद सभी बुलेट की मांग करने लगे। आरोपी बेटी को खाने-पीने के लिए परेशान करने लगे।
9 नवंबर 2019 की सुबह सात बजे सूचना मिली कि पुत्री सतानो देवी को उसके पति हंसराज, ससुर हरीशचंद्र, सास मुन्नी देवी, जेठ राजवीर, ददिया ससुर भीकम ने जलाकर मार दिया। इस पर वह अपनी पत्नी, बेटी आदि के साथ बेटी के ससुराल पहुंचा। वहां ताला लगा हुआ था। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि पुत्री को उसके ससुराल वालों ने जलाया और उसकी अधजली लाश खेत में ही गाड़कर कहीं चले गए। सूचना पर कादरचौक पुलिस ने खेत से लाश निकाल सील की थी। पुलिस ने दहेज हत्या सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की। आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की गवाही सुनी। साक्ष्यों का अवलोकन कर मृतका के पति व सास को दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
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कोर्ट ने कहा, न्यायालय मृतका की खामोश चीखों का मूक दर्शक नहीं रह सकता
बदायूं। सजा पर बहस सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने भौतिक वस्तु, यानी इस मामले में बुलेट मोटरसाइकिल के लालच में दहेज हत्या का अपराध किया है। मृतका को विवाह के आरंभ से ही अभियुक्तों ने मानसिक और शारीरिक यातना और उत्पीड़न का शिकार बनाया था। एक युवती होने के नाते, विवाह के समय उसने एक सुंदर वैवाहिक जीवन के सपने देखे थे। हालांकि, विवाह एक बुरे सपने में बदल गया और जल्द ही उसके सारे सपने चकनाचूर हो गए। यह न्यायालय उसकी खामोश चीखों का मूक दर्शक नहीं रह सकता। आरोपियों ने न केवल उसकी हत्या की, बल्कि सुनियोजित तरीके से अपराध को अंजाम दिया। संवाद
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