इस तरह हो रहा था प्लांट में आयात
कंपनी से जुड़े जानकार बताते हैं कि सैजनी स्थित एचपीसीएल प्लांट संचालन में प्रतिदिन करीब सौ टन (एक हजार क्विंटल) पराली की जरूरत होती थी। इसका खरीद रेट 340 रुपये प्रति क्विंटल तय था जो करीब 16 एग्रीगेटर के जरिये पूरा किया जा रहा था। पराली स्थानीय स्तर पर बेहद कम मिल पा रही थी लेकिन शाहजहांपुर, पीलीभीत आदि स्थानों से इसे खरीदकर प्लांट को उपलब्ध कराया जाता था। इस लिहाज से करीब एक करोड़ 33 लाख रुपये की पराली प्रतिमाह खरीदी जाती थी।
इस तरह होता था निर्यात
जानकारों ने बताया कि एक क्विंटल पराली में करीब 14 किलो गैस बनती है। इस लिहाज से करीब 14 हजार किलो गैस प्रतिदिन बनाई जा रही थी। महीने के लिहाज से कमाई पर गौर करें तो करीब साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा की गैस प्रतिमाह बेची जा रही थी। पराली से गैस मिलने के बाद करीब 70 फीसदी हिस्सा बायो वेस्ट के रूप में निकलता है जो खाद के रूप में बेचा जा रहा था। यह किसानों को केवल ढाई रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही थी और इस लिहाज से करीब पचास लाख रुपये प्रतिमाह अलग कमाई हो रही थी।