बदायूं। गत 28 फरवरी को बीएसए कार्यालय में हुए हंगामे के बाद यह मुद्दा विधानपरिषद की बैठक में उठा है, जिसमें नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने बीएसए के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। काबिल-ए-गौर है कि बीएसए विगत 28 फरवरी को ही रिटायर हो चुके हैं, ऐसे में आगामी समय में क्या कार्रवाई हो सकती है। इस पर संशय बना है। बीएसए कार्यालय में कई दिन से एक लिपिक की नियुक्ति और ट्रांसफर को लेकर गहमागहमी का माहौल था।
बता दें कि 24 फरवरी को बीएसए रामपाल सिंह राजपूत कार्यालय में बैठे शासकीय कार्य निपटा रहे थे। उसी दौरान कनिष्ठ सहायक अमित भास्कर की पत्नी सुतिन सिंह लगभग सौ-सवा सौ पुरुष और 50-60 महिलाओं के साथ कार्यालय में घुस आईं। उन्होंने उनको चारों ओर से घेर लिया और भीड़ के साथ मिलकर गाली गलौज, अभद्र व्यवहार करते हुए जान से मारने की धमकी दी, जिस पर बीएसए ने छह लोगों को नामजद करते हुए लगभग 180 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई थी।
इसके अलावा छह शिक्षकों को निलंबित भी कर दिया था। इधर, कनिष्ठ सहायक की पत्नी ने बीएसएस पर छेड़छाड़ करने का आरोप भी लगाया था। उनके अनुसार उन्होंने इसकी तहरीर भी पुलिस को दी, लेकिन पुलिस ने उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इस सारे हंगामे के बीच बीएसए 28 फरवरी को रिटायर भी हो गए। तब से अंदरूनी शिकायतों का दौर जारी था।
इधर, बसपा के कुछ लोगों ने भी बीएसए की शिकायत शासन तक की, जिसके बाद विधान परिषद की बैठक में भी मंगलवार को यह मुद्दा छाया रहा। आरोप था कि बदायूं के स्कूलों में कार्यरत अनुसूचित जाति के शिक्षकों को अकारण परेशान कर प्रशासनिक आधार बनाकर स्थानांतरण किया जाता है। बीएसए कार्यालय में कार्यरत लिपिकों, अनुचरों, कंप्यूटर आपरेटरों और सहायक लेखाकार आदि के साथ दुर्व्यवहार कर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की जाती है। यहां तक कि पीड़ित व्यक्ति का पक्ष तक नहीं लिया जाता। इस पर नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि बीएस के खिलाफ कठोर कार्रवाई की संस्तुति की गई है लेकिन अब सवाल ये उठ रहा है कि रिटायर हो चुके बीएसए पर कार्रवाई होगी तो कैसे। इस संबंध में रिटायर्ड बीएसए रामपाल सिंह से से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ था।