गरीब जरूरतमंद बच्चों की नए सत्र में मॉडल स्कूलों में पढ़ने की चाह एक अप्रैल से पूरी होती नजर नहीं आ रही है। जिले में तैयार किए जा रहे मॉडल स्कूलों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं किया जा सका है। इतना ही नहीं शिक्षकों की तैनाती करने की कवायद भी चल रही है। जिसे पूरा होने से दो से तीन माह का समय लग सकता है। जबकि शासन के निर्देश पर गौर करें तो नए सत्र में प्रवेश लिए जाने थे।
कॉवेंट की तर्ज पर शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से शासन की ओर से जिले में तीन मॉडल स्कूलों को खोलने की प्रक्रिया शुरू कराई गई। बिसौली के नागपुर नूरपुर, कादरचौक के चौडेरा तथा सालारपुर के अर्सिस बर्खिन में इन्हें खोला जाना था। तीन साल से चल रहा निर्माण आजतक पूरा नहीं हो सका है। हालांकि शासन के साफ निर्देश थे कि सत्र 2015-16 में हर हाल में इन्हें शुरू कर दिया जाए और प्रारंभ से ही दाखिले लिए जाए लेकिन वास्तविक स्थिति में अभी अधूरे पड़े काम और शिक्षकों की तैनाती न होने की वजह से दाखिले होने मुश्किल हैं। इतना ही नहीं इसमें दो से तीन माह का समय और लगने की उम्मीद है। डीआईओएस वीना यादव बताती हैं कि स्कूलों में फिनिशिंग कार्य चल रहा है। जो करीब पूरा होने को है। वहीं मंडल स्तर पर इसमें रखे जाने को भर्ती प्रक्रिया के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया भी गतिशील है। लिहाजा अधूरा होने की वजह से एक अप्रैल से दाखिले लिए जाने मुश्किल हैं लेकिन ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रवेश लिए जाएंगे। इसी सत्र से स्कूल प्रारंभ कराए जाएंगे।