तहसील क्षेत्र के गांव गुधनी में आर्य संस्कारशाला के तत्वावधान में होली के पावन पर्व पर करीब पांच सौ परिवारों की ओर से एक साथ यज्ञ कराया गया। साथ ही सभी ने सामग्री के साथ होलिका में आहुति दी। इसके बाद यहां आयोजित सत्संग समारोह में बोलते समाज सुधारक आचार्य संजीव रुप ने कहा कि होली एकता, प्रेम और भाईचारे का जहां सुंदर पर्व है वहीं एक अतंर्राष्ट्रीय यज्ञ समारोह भी है। क्योकि इस दिन घर-घर में बलगुरियां छोटे-उपले जलाए जाते है। घर-घर होलिका का दहन किया गया। लोगों ने बलगुरियां के साथ घी-मिष्ठान युक्त सामग्री की बारह आहुतियां भी दी। वहीं होली में कम एवं व्यवस्थित ढंग से लकड़ी जलाकर उसमें सामग्री की आहुतियां बाहर महीनों के नाम से डाली गई ताकि ये पर्व उद्देश्यपूरक भी होगा और सुखदाई भी। निरुद्देश्य लकड़ी कंडा जलाना ठीक नहीं। इस मौके पर अगरपाल सिंह, प्रश्रय आर्य, आदेश उपाध्याय, अनिल कुमार, ब्रजभान सिंह, शिवकुमार सिंह, पन्नालाल, किशनसिंह, इंद्रपाल राजपूत, सुखवीर सिंह, अनेकपाल, किशनपाल, प्रेमवीर, बद्रीप्रसाद आर्य, रामस्वरुप, लिटिल आर्य, प्रज्ञा आर्य, सूरजवती आदि मौजूद रही।