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Budaun News: मुस्लिम बहुल सीट पर काबिज होना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती

Wed, 19 Apr 2023 02:14 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
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फोटो18बीडीएन26-कार्यालय नगर पालिका परिषद,ककराला।संवाद
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बदायूं। मुस्लिम बहुल ककराला नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष पद पर काबिज होने का सपना भाजपा यूं तो पिछले कई चुनाव से देख रही है, लेकिन समीकरण कभी उसके अनुकूल नहीं हो पाए। पिछले चुनाव में भाजपा ने यहां निर्दलीय प्रत्याशी नजमुल खां को समर्थन दिया था, लेकिन वह सपा प्रत्याशी परवीन मुस्लिम से 2079 मतों के अंतर से हार गए थे। इस चुनाव में यहां मुकाबला सपा और बसपा के बीच होने के आसार बताए जा रहे हैं। हालांकि अब तक कांग्रेस को छोड़ कोई पार्टी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं कर सकी है।
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ककराला की राजनीति यहां के तीन-चार परिवारों के ही ईद-गिर्द घूमती रहती है। हिंदू मतदाताओं में से अधिकांश का समर्थन भाजपा को हासिल होता है, लेकिन संख्याबल में महज दस फीसदी होने के कारण वे अपने बूते भाजपा को जीत दिलाने की स्थिति में नहीं हैं। मुस्लिम मतदाताओं में बिखराव तो होता है, लेकिन बड़ा धड़ा जिस ओर हो जाता है, चुनावी समर में वही प्रत्याशी फतह हासिल कर लेता है। लिहाजा हर चुनाव में सपा और बसपा का पूरा जोर मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में लाने पर ही रहता है।
वर्ष 2017 के चुनाव की बात करें तो सपा ने यहां से बसपा के पूर्व विधायक मुस्लिम खां की पत्नी परवीन मुस्लिम को चुनाव मैदान में उतारा था। भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशी नजमुल हसन खां को समर्थन दिया था। परवीन मुस्लिम 6024 मत पाकर विजयी रही थीं, जबकि नजमुल हसन खां को 3945 मत मिले थे। पूर्व चेयरमैन महबूब सकलैनी 2371 मत पाकर तीसरे, इंतखाब सकलैनी 1805 मत पाकर चौथे और असलम खान 1793 मत पाकर पांचवें स्थान पर रहे थे। ये सभी निर्धलीय चुनाव लड़े थे।
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पूर्व विधायक मुस्लिम खां चूंकि विधानसभा चुनाव के दौरान शेखूपुर सीट से टिकट न मिलने पर सपा छोड़कर बसपा में शामिल हो गए थे और बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े थे, लिहाजा वह नगर परिषद चुनाव में बसपा के ही टिकट पर खुद या अपनी पत्नी परवीन मुस्लिम को चुनाव मैदान में उतार सकते हैं। सपा से इंतखाब अहमद सकलैनी, रफीउद्दीन खान और महबूब सकलैनी के नाम चर्चा में है, जबकि भाजपा से टिकट के लिए असलम खान और मरगूब जफर उर्फ सोनी ने आवेदन किया है। कांग्रेस इब्ने अली खां को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।
ककराला के विकास को नहीं मिल पा रही गति
ककराला के विकास की बात की जाए तो किसी स्टेट या नेशनल हाईवे से जुड़ा न होने की वजह से यहां विकास की गति हमेशा से ही धीमी रही है। शाम सात बजे के बाद जिला या तहसील मुख्यालय से नगर में पहुंच पाना ही मुश्किल होता है। चिकित्सा-स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन आदि की अच्छी सुविधा न होना यहां के लोगों को अखरती है। परिवहन के संसाधन न होने का ही नतीजा है कि यहां कोई बड़ा उद्योग नहीं है।
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ककराला की ये समस्याएं बन सकती हैं चुनावी मुद्दा
- पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था ठीक न होना।
- भीषण गर्मी में भी नगर में लगे सभी वाटर कूलर खराब हैं।
- नगर में वाहन पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है।
- नगर पालिका परिषद कार्यालय में आज तक कंट्रेल रूम और हेल्प डेस्क स्थापित नहीं हो सकी है।
- गृह और जलकर बिना किसी मानक के मनमाने ढंग से निर्दारित किए गए हैं।
- नगर पालिका परिषद की संपत्तियों पर अवैध कब्जे हैं।
- नगर पालिका परिषद इंटर कॉलेज में पढ़ाई की व्यवस्था चौपट है।
- नगर में साफ-सफाई की व्यवस्था का बुरा हाल है।
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