बदायूं। जिले के दो मिनी औद्याेगिक आस्थानों बिसौली और इस्लामनगर क्षेत्र में उद्यमियों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में यहां जिन उद्यमियों को प्लॉट आवंटित हुए थे वे परेशान हैं। सबसे बड़ी परेशानी बिसौली के मिनी औद्योगिक आस्थान के ऊपर से गुजर रही 33 केवीए लाइन को लेकर है। इस लाइन को शिफ्ट किए जाने का मुद्दा कई बार जिला उद्योग बंधु की बैठक में उठ चुका है, लेकिन उद्यमियों को अब तक कोई राहत नहीं मिल सकी है। वहीं इस्लामनगर क्षेत्र में बिजली के लाइनें तो परेशानी हैं ही साथ ही भूमि विवाद के मामले भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। इस कारण दोनों ही स्थानों पर औद्योगिक इकाइयां स्थापित नहीं हो पा रहीं।
बिसौली के मिनी औद्योगिक आस्थान में वर्ष 2000 के आसपास करीब 20 उद्यमियों को प्लॉट आवंटित हुए थे, बावजूद इसके औद्योगिक गतिविधियों का अपेक्षित संचालन नहीं हो पाया। हालात यह हैं कि प्लॉट आवंटन के बाद भी उद्यमियों को बुनियादी सुविधाओं और विभागीय समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। विद्युत निगम की 33 केवीए की हाईटेंशन लाइन उद्योग स्थापित करने की राह में बड़ी बाधा है।
बिसौली के मिनी औद्योगिक आस्थान में अनिल गुप्ता को पांच प्लॉट, वीरेंद्र अग्रवाल को दो, राजीव गुप्ता को दो और राजीव अग्रवाल को दो प्लॉट आवंटित किए गए थे। अन्य उद्यमियों को भी प्लॉट आवंटित हुए थे, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर खुल सकें, बावजूद इसके औद्योगिक आस्थान में इकाइयां नहीं लग सकीं।
उद्यमियों का कहना है कि हाईटेंशन लाइन प्लॉटों के ऊपर से गुजरने के कारण नए निर्माण और उद्योग स्थापित करने में परेशानी आ रही है। इससे प्लॉटों का समुचित उपयोग प्रभावित हो रहा है। लाइन शिफ्ट कराने के लिए कई बार शिकायतें की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
वहीं, इस्लामनगर के मिनी औद्योगिक आस्थान का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए यहां इकाइयां स्थापित नहीं हो सकी हैं। वहीं कुछ प्लॉटों के ऊपर से विद्युत लाइनें गुजर रही हैं, उन्हें भी शिफ्ट किया जाना है।
सालारपुर के बड़े औद्याेगिक आस्थान में 20 से ज्यादा इकाइयां स्थापित हैं। इस आस्थान में कुछ हालात ठीक बताए गए हैं।
ये प्रकरण हैं लंबित
कछला रोड पर ग्राम छतुईया, उझानी में वेयरहाउस बनना है। उद्यमी विमल सनवती ने 9 मार्च 2026 को वेयरहाउस की एनओसी के लिए जिला पंचायत विभाग में आवेदन किया, लेकिन एनओसी नहीं मिली। जिला पंचायत ने यह कह दिया कि लैंड पार्सल एनएचएआई के दायरे में आता है, इसलिए उन्हें पहले एनएचएआई से अनुमति लेनी होगी। वहीं इन्वेस्टर ने पिछली बैठक में यह बताया था कि लैंड पार्सल राज्य सरकार के हाईवे एवं सरकारी चकरोड पर स्थित है।
श्यामनगर, खेड़ा बुजुर्ग में एक मेडिकल डिवाइस उत्पादन यूनिट लगनी थी। 25 जून को उद्योग विभाग में पत्र देकर इन्वेस्टर ने मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क की निर्धारित चौड़ाई कम बताते हुए कहा था कि सड़क भारी वाहन चलाने लायक नहीं है। यह प्रकरण जिला उद्योग बंधु की बैठकों में लगातार उठाया जा रहा है।
उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार धींगड़ा खेड़ा बुजुर्ग में भगवती फैब्रीकेशन के ऊपर से 33 केवीए विद्युत लाइन के गुजरने का मामला लंबे समय से उठा रहे हैं, लेकिन इनकी समस्या अब तक हल नहीं हुई है। वह कई बार यह लिखकर दे चुके हैं कि लाइन की वजह से इंडस्ट्री चलाने में दिक्कत हो रही है।
औद्योगिक आस्थान से हाईटेंशन लाइन को शिफ्ट करने के लिए एस्टीमेट तैयार कर संबंधितों को दे दिया गया है। अभी एस्टीमेट की धनराशि जमा नहीं हुई है। धनराशि जमा होते ही लाइन शिफ्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। - नरेंद्र चौधरी, अधिशासी अभियंता विद्युत निगम, बिसौली
बिसौली के मिनी औद्योगिक आस्थान में खिंची लाइनें हटवाने के लिए विद्युत निगम से कहा गया है। अभी एस्टीमेट नहीं मिला है। इस्लामनगर के मिनी औद्योगिक आस्थान का मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए मामला लटका हुआ है। - सचिन जैन, उपायुक्त उद्योग बदायूं
सड़क निर्माण के लिए आई धनराशि कहीं और लगा दी
अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल इस्लामनगर के जिलाध्यक्ष सत्यपाल गुप्ता ने करीब एक किमी लंबे अल्लैहपुर मार्ग को बनवाने का मामला बैठक में कई बार उठाया। लोनिवि के अभियंता को पत्र लिखा, लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। उनका कहना है कि एक वर्ष पूर्व यहां के लिए पैसा स्वीकृत हुआ था, जो इस मार्ग पर ना लगाकर कहीं और लगा दिया, यह कस्बे का प्रमुख मार्ग है, इस मार्ग पर कस्बे का प्रमुख मंगला देवी मंदिर व एक इंटर कॉलेज भी है।
-आवंटियों ने बताई अपनी परेशानी -
राजीव गुप्ता ने बताया कि मिनी औद्योगिक आस्थान में प्लॉट आवंटित होने के बाद उद्योगों के संचालन में कई तरह की समस्याएं आ रही हैं। प्लॉटों के ऊपर से गुजर रही 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन के कारण निर्माण कार्य और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में परेशानी होती है। लाइन शिफ्ट कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से कई बार मांग की गई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।
अनिल गुप्ता ने बताया कि मिनी औद्योगिक आस्थान की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र में उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्षों बाद भी अपेक्षित औद्योगिक विकास नहीं हुआ है। हाईटेंशन लाइन जैसी समस्याओं के कारण प्लॉटों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। संबंधित विभागों को उद्यमियों की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान कर औद्योगिक गतिविधियां शुरू कराने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
जिला उद्योग बंधु की बैठक में कई बार मांग उठाए जाने के बावजूद नहीं बनी इस्लामनगर की जर्जर मंगला
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