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यहां तो टिनशेड में चल रहा जीआईसी

Sat, 11 Apr 2015 07:18 PM IST
badaun
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जिले में जहां शहर का राजकीय इंटर कॉलेज बदहाली की दास्तां बयां कर रहा है। वहीं विकास क्षेत्र निजामपुर की हालत दयनीय है। कमरों में छत तक नहीं है। टिनशेड में बच्चे फर्श पर बैठकर ही शिक्षा लेते हैं और टाट-पट्टी पर ही बोर्ड की परीक्षा देते हैं। अव्यवस्था हावी होने के बावजूद हर साल पांच सौ से अधिक बच्चों का केंद्र भी बना दिया जाता है। सुविधाओं और व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ नहीं है। छह सौ बच्चों की शिक्षा तीन शिक्षकों के सुपुर्द है। अब बच्चों का मोह भी भंग होने लगा है।
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जिले में राजकीय इंटर कॉलेज के नाम सिर्फ दो विद्यालय हैं। पर दोनों की हालत खस्ता हो चली है। निजामपुर विद्यालय की बात करें तो यह विद्यालय जूनियर से हाईस्कूल और फिर इंटर कॉलेज में तब्दील हुआ, परंतु व्यवस्थाएं फिर भी ज्यों की त्यों ही रहीं। कॉलेज में प्रयोगशालाएं और अन्य सुविधाएं तो दूर बैठने को जगह तक नहीं मिली। बच्चे तपती धूप में टिनशेड के नीचे बैठकर शिक्षा लेते हैं। बरसात में फर्श टपकता है। इतना ही नहीं तीन शिक्षक ही कॉलेज को सींच रहे हैं। शैक्षिक गुणवत्ता तो दूर सप्ताह में एक कक्षा भी ढंग से नहीं लग पाती है। लिहाजा बच्चों का भी मोह भंग होने लगा है।

विकास खंड में एक ही जीआईसी कॉलेज
कादरचौक विकास खंड में एक मात्र राजकीय इंटर कॉलेज होने से इसमें पढ़ने वाले बच्चों का भी क्रेज अधिक है, लेकिन ढंग से शिक्षा न मिलने के कारण उनका बौद्धिक ज्ञान वहीं का वहीं रहता है। बोर्ड के स्टूडेंट कोचिंग पढ़कर शिक्षा ग्रहण करते हैं।
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पास में बन चुकी है बिल्डिंग, नहीं हुई हैंडओवर
निजामपुर जीआईसी कॉलेज की दशा को देखते हुए काफी पहले बजट स्वीकृत हुआ था। इसके तहत नई बिल्डिंग बनाई गई है। बताते हैं कि निर्माण कार्य चलते हुए कई साल हो चुके हैं लेकिन बिल्डिंग अभी तक हैंडओवर नहीं हुई है। बीच में बिल्डिंग में दरार आने के कारण रिपेयरिंग जरूर कराने की जरूरत पड़ गई।

अटैच्ड में चल रहे दो शिक्षक
एक तरफ जहां शिक्षकों की कमी है। वहीं दो शिक्षकों का अटैच्डमेंट कर रखा है। विभाग की माने तो एक शिक्षक करनपुर बिसौली में है, जबकि एक शिक्षक को डीआईओएस कार्यालय में लगा रखा है। सालों से यह शिक्षक संबद्ध वाली जगह ही काम करते आ रहे हैं।
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