बदायूं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत डॉक्टरों और कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखने लगा है। अस्पताल में रोजाना 1400 से 1500 मरीज ओपीडी में उपचार कराने पहुंचते हैं, लेकिन 15 डॉक्टरों में से 10 के हड़ताल पर चले जाने से व्यवस्था पांच डॉक्टरों के भरोसे रह गई है। मरीजों की भीड़ के बीच उपचार की जिम्मेदारी संभालने के लिए शेष डॉक्टरों का ड्यूटी समय बढ़ा दिया गया है। साथ ही उनके अवकाश भी निरस्त कर दिए गए हैं। अब बेहद जरूरी परिस्थितियों में ही छुट्टी दी जा रही है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में सामान्य दिनों में 15 डॉक्टर मरीजों को देखते हैं। एनएचएम के तहत काम करने वाले डॉक्टर और कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इससे अस्पताल में उपलब्ध डॉक्टरों की संख्या घट गई है। पांच डॉक्टरों को ही ओपीडी में आने वाले मरीजों को देखना पड़ रहा है। प्रतिदिन डेढ़ हजार तक मरीजों की भीड़ के बीच सीमित डॉक्टरों पर काम का दबाव बढ़ गया है।
एनएचएम के तहत कार्यरत डॉक्टर, एएनएम, आशा, संगिनी और अन्य कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों ने पहले 10 अक्तूबर तक सीएमओ कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद वे लखनऊ में चल रहे आंदोलन में शामिल हो गए। हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं।
डॉक्टरों की छुट्टियों पर रोक
अस्पताल में मरीजों के उपचार की व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपलब्ध डॉक्टरों की ड्यूटी का समय बढ़ाया गया है। इसके साथ ही उनके अवकाश निरस्त कर दिए गए हैं। अब केवल बेहद जरूरी काम होने पर ही अवकाश दिया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का प्रयास है कि डॉक्टरों की कमी के बावजूद ओपीडी का संचालन जारी रहे और मरीजों को उपचार मिल सके।
ये डॉक्टर हैं हड़ताल पर
-डॉ. उत्पाल रस्तोगी, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. अंगनपाल, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. राहुल, डॉ. पुलकित तोमर, डॉ. रवि, डॉ. विकास शर्मा, डॉ. स्पर्श शर्मा, डॉ. अनिल कुमार।
हड़ताल पर वजह से मरीजों को कोई दिक्कत न हो। इसके लिए परमानेंट डॉक्टर और स्टाफ की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जा रही है। -डॉ. सतीश चंद्र नागर, सीएमएस जिला अस्पताल
जिला अस्पताल में डॉक्टर कक्ष के बाहर लाइन लगी हुई। संवाद- फोटो : Archive
जिला अस्पताल में डॉक्टर कक्ष के बाहर लाइन लगी हुई। संवाद- फोटो : Archive