बदायूं। स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाएं अधूरी हैं। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अभी तक प्लेटलेट्स बनाने की व्यवस्था नहीं है। ब्लड सेपरेशन यूनिट का लाइसेंस अटका हुआ है। ऐसे में डेंगू होने पर मरीजों के तीमारदारों को एक बार फिर प्लेटलेट्स के लिए बरेली,अलीगढ़ और सैफई जाने को मजबूर होना पड़ेगा। इस परेशानी को जिम्मेदार भी नहीं देख रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग तीन साल से लगातार डेंगू की रोकथाम करने में नाकाम हो रहा है। तीन साल के आंकड़े बता रहे हैं कि हर साल डेंगू के मरीज बढ़े हैं। इस बार भी डेंगू व मलेरिया का खतरा सिर पर है। कोई इंतजाम विभाग द्वारा नहीं किया गया है।
प्लेटलेट्स की सुविधा न होने से डेंगू के मरीजों को एक बार फिर परेशानी का सामना करना होगा। गांवों में फॉगिंग भी ठीक से नहीं हो रही है। ऐसे में लोगों को मलेरिया का डर सता रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अब तक मेडिकल कॉलेज से लेकर जिला अस्पताल और सीएचसी में न तो डेंगू वार्ड बनाया और न ही अन्य इंतजाम कराए हैं।
तीन साल से बढ़ रहा है डेंगू का प्रकोप
तीन साल से डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। 2020 तक जिले में डेंगू को प्रकोप नहीं था। 2021 में डेंगू ने कहर बरपा दिया तो लोगों को लगा कि डेंगू एक जानलेवा है। इस साल जिले में 471 लोग सरकारी रिकार्ड में संक्रमित हुए थे, जबकि कई लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद से 2022 में संख्या बढ़कर 579 पहुंची। जिले भर में हाहाकार रहा। 2023 में रिकार्ड टूटा, इस साल संख्या 723 पहुंच गई। स्वास्थ्य विभाग की जमकर फजीहत हुई। अगर इस बार विभाग नहीं चेता तो डेंगू संक्रमण से इस बार भी जूझना पड़ेगा।
संचारी रोग नियंत्रण के लिए टीमें काम कर रहीं हैं। डेंगू मलेरिया का संक्रमण अभी नहीं है। समय रहते सभी इंतजाम कर लिए जाएंगे। जून में डेंगू वार्ड बनकर तैयार हो जाएंगे। जांच के लिए भी टीमें गठित की जाएंगी। -डॉ.अब्दुल सलाम, सीएमओ
ब्लड सेपरेशन यूनिट तैयार है पर लाइसेंस औषधि विभाग के पास लंबित है। उम्मीद है कि जल्दी ही लाइसेंस मिलेगा और काम शुरू हो जाएगा। डेंगू फैलने से पहले लाइसेंस लेने की तैयारी है। डॉ. कप्तान सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल