बदायूं में दूूषित पानी जान का दुश्मन बनने लगा है। कई गांवों में दूषित पानी की वजह से बीमारियों का प्रकोप बना हुआ है। इन गांवों में हेपेटाइटिस, टायफाइड और डायरिया लोगों को चपेट में ले रहा है। जगत ब्लॉक के गांव रायपुर में पूजा नाम की महिला की मौत टायफाइड से हो गई। बेला गांव में कई लोग बीमार हैं। उझानी ब्लॉक के गांव नरऊ में भी बड़ी संख्या में हेपेटाइटिस के रोगी निकल रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार विभाग गंभीर नहीं हैं।
बारिश का मौसम जलजनित बीमारियों के साथ मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज से भी खतरनाक होता है। मच्छर जनित बीमारियों के लिहाज से तो बदायूं हाईरिस्क श्रेणी में है। अब जलजनित बीमारियों के मामले में भी रिकॉर्ड बनने की ओर है। तीन माह पहले जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर शुरू हुआ, इसके बाद यहां अब तक 90 हेपेटाइटिस के रोगी मिल चुके हैं। गौर करने की बात यह है कि 17 रोगी तो जिला जेल में ही मिले हैं। अस्पतालों में इन दिनों पहुुंचने वाले रोगियों में ऐसे रोगी ज्यादा है जो हेपेटाइटिस, टायफाइड, डायरिया या फिर लिवर संबंधी बीमारी का शिकार हैं। दूषित पानी के कारण लोग बीमार हो रहे हैं।
दूषित पानी के मामले में जगत और उझानी ब्लॉक सबसे आगे हैं। जगत की ग्राम पंचायत बसइया खेड़ा के मजरा रायपुर के हैंडपंपों में पीला पानी आ रहा है। गांव में रोशनी (13) पुत्री सुभाष, जागन (23) पुत्र मनोहर, रामवीर (22) पुत्र श्रीराम, टिंकू (35) पुत्र हरिनंदन लंबे समय से बीमार थे। जांच कराई तो पता लगा कि वे पीलिया का शिकार हैं। गांव में बड़ी संख्या में लोग टायफाइड का भी शिकार हैं। पूजा (22) पत्नी सुधीर की तो टायफाइड से चार दिन पहले मौत हो चुकी है। आसपास के गांवों में भी यही हाल है। उझानी ब्लॉक के गांव नरऊ में भी हेपेटाइटिस के कई रोगी मिल चुके हैं।
हैंडपंप दे रहे पीला पानी, जांच नहीं करा रहे जिम्मेदार
जिले में तमाम हैंडपंप पीला पानी दे रहे हैं। यह पानी पीने योग्य नहीं होता है। गांव के लोग इस पानी का इस्तेमाल करके बीमार हो रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी हैंडपंपों के पानी की जांच नहीं करा रहे हैं। सरकारी इंडिया मार्क हैंडपंपों के पानी की जांच का जिम्मा जल निगम और स्वास्थ्य विभाग पर होता है। अलग-अलग योजनाओं और मदों में हैंडपंप तो लगवाए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार इनसे निकले वाले पानी की जांच कराना जरूरी नहीं समझते। इसका खामियाजा जिले के लोगों को अब हेपेटाइटिस, टायफाइड और डायरिया जैसी बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
डॉक्टर की बात
पीलिया, हेपेटाइटिस के अलावा टायफाइड और डायरिया जैसी बीमारियों का प्रमुख कारण दूषित पानी है। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर शुरू होने के बाद से तीन माह में अब तक 90 रोगी मिल चुके हैं। इन दिनों टायफाइड के रोगी भी बड़ी संख्या में अस्पताल आ रहे हैं। लोगों को पीने के पानी को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है। पानी की जांच भी होनी चाहिए कि पानी पीने योग्य है या नहीं।
-डॉ. शिव मोहन कमल, फिजीशियन जिला अस्पताल
कुछ गांवों में पीलिया के अलावा टायफाइड के रोगी भी मिल रहे हैं। जलजनित बीमारियों का सीजन है। कुछ गांवों में इंडिया मार्का हैंडपंपों का पानी भी पीने योग्य नहीं है। स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले रोगियों का सही ढंग से उपचार किया जा रहा है। हैंडपंपों के पानी की जांच जरूरी है।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ