बदायूं। प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना का गरीबों को लाभ नहीं मिल पा रहा। योजना के तहत आयुष्मान गोल्डन कार्डधारक गरीब को साल में पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा है। यहां बता दें 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 11.20 लाख लाभार्थियों के सापेक्ष मात्र 2.30 लाख को ही आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जा सके हैं।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना है। पर, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि योजना के तहत अब तक जिले में 45 हजार से ज्यादा अंत्योदय और बीपीएल परिवारों के लिए भी आयुष्मान कार्ड जारी नहीं हो सके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना का जोर शोर से शुभारंभ किया था। गरीबों को साल में पांच लाख तक के मुफ्त इलाज का प्रचार-प्रसार भी खूब किया गया। आयुष्मान मित्रों की तैनाती भी की गई, लेकिन चार साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी जिले के गरीबों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा।
योजना के तहत जिले में 244970 परिवारों के 1120130 लाभार्थियों को आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी किए जाने थे। एक परिवार में चार से पांच लाभार्थियों का औसत रखा गया था। इनमें 45 हजार से ज्यादा अंत्योदय और बीपीएल परिवार भी शामिल हैं। गौर करने वाली बात यह है कि योजना को शुरू हुए चार साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अब तक 1120130 के सापेक्ष 230988 लाभार्थियों को ही गोल्डन कार्ड जारी किए जा सके हैं। जिले में गंगा और रामगंगा के तटवर्ती 50 से ज्यादा गांव ऐसे हैं जहां एक भी आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी नहीं हो सका है।
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ये हैं आयुष्मान गोल्डन कार्ड के लाभ
- इस योजना के तहत पूरे परिवार को कवर किया जा सकता है।
- गरीब वर्ग की स्वास्थ्य बीमा तक पहुंच प्रदान करता है। लाभार्थी इस योजना का लाभ पूरे देश में मुफ्त में उठा सकते हैं।
- इसमें 1354 मेडिकल और सर्जिकल पैकेज और 25 स्पेशलिटी कैटेगरी शामिल हैं।
- लगभग 50 प्रकार के कैंसर और कीमोथेरेपी की लागत को भी यह कवर करता है।
- एक से अधिक सर्जरी के मामले में यह पहली एक की पूरी लागत, दूसरी की आधी और तीसरी की एक चौथाई लागत को कवर करेगा।
- डे-केयर खर्च को कवर करता है। इस कार्ड का इस्तेमाल कोविड मरीज भी कर सकते हैं।
- लाभार्थी नेटवर्क अस्पतालों में कैशलेस इलाज का लाभ उठा सकते हैं।
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गांव स्तर पर नहीं हो रहा काम
- गांव स्तर पर आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी करने की जिम्मेदारी वीएलई (ग्राम स्तरीय उद्यमी) की है, पर वीएलई गांवों में काम ही नहीं करते। शहरी और ग्रामीण इलाकों में अंत्योदय के साथ बीपीएल परिवारों को कार्ड जारी करने की जिम्मेदारी राशन कोटेदारों को भी दी गई है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता और अनदेखी के कारण कोटेदार भी कार्ड जारी करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। इस कारण गरीबों को कार्ड जारी न होने से उनको योजना का लाभ नहीं मिला पा रहा। हाल ही में शासन स्तर से शत-प्रतिशत गरीबों को कार्ड जारी करने को लेकर सख्ती की गई है, इसके बाद कुछ मामूली असर दिख रहा है लेकिन यह असर आदेश और निर्देशों तक ही सीमित है।
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यह बात सही है कि बदायूं में आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी करने की रफ्तार काफी कम है। लक्ष्य के सापेक्ष काफी कम लाभार्थियों को कार्ड जारी किए जा सके हैं। वीएलई के स्तर से भी लापरवाही की जा रही है। संबंधितों को युद्ध स्तर पर आयुष्मान गोल्डन कार्ड जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ