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बीमार कहां जाएं....जिला अस्पताल को खुद इलाज की जरूरत

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जिला अस्पताल की इमरजेंसी में लगाया गया निजी पंखा। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिला अस्पताल...कहने को यहां मरीजों का इलाज होता है लेकिन उन्हें यहां कौन-कौन सी समस्याओं से जूझना पड़ता है, यह भर्ती मरीजों से बेहतर कोई नहीं जानता। यहां मरीजों को एक समस्या नहीं झेलनी पड़ रही है बल्कि तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से तो मरीजों का सबसे ज्यादा बुरा हाल है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी निभाने वाला जिला अस्पताल खुद ही बीमार चल रहा है।
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जिला अस्पताल में बिजली व्यवस्था सबसे खराब हो चुकी है। यहां दिन में एक-दो बार नहीं कई बार बिजली जाती है। कभी-कभी चार-पांच घंटे के लिए बिजली नदारद हो जाती है। इस दौरान मरीजों पर गर्मी आफत बनकर टूटती है। उनका अस्पताल में रुकना मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत भर्ती मरीजों को होती है। वह बेड से उठ नहीं पाते। ऐसा कई दिन से चल रहा है। शनिवार को भी अस्पताल में यही हालत देखने को मिली। जहां अस्पताल का स्टाफ कूलर लगाकर आनंद लेता मिला, तो वहीं बिजली आने के बावजूद मरीज परेशान दिखे। अस्पताल की इमरजेंसी में पंखे ऐसे चल रहे थे कि उनकी हवा मरीजों तक ही नहीं पहुंच रही थी। तीमारदार अली अहमद ने बताया कि बेड के ऊपर पंखा जरूर लगा है लेकिन उससे हवा नहीं आती। इससे उन्हें अपना पंखा लाना पड़ा है। सरना सती ने बताया कि वह अपने घर से हाथ का पंखा लेकर आई हैं। उससे मरीज की हवा करती हैं।
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ओपीडी में समय से नहीं बैठते डॉक्टर
जिला अस्पताल की ओपीडी का और ज्यादा बुरा हाल है। यहां काफी समय से यही शिकायत देखने को मिल रही है कि डॉक्टर समय से नहीं बैठते। मरीज सुबह आठ बजे से पहुंचना शुरू हो जाते हैं लेकिन डॉक्टर 10 बजे के बाद ही ओपीडी में बैठते हैं। तब कहीं मरीजों को देखा जाता है। यह समस्या हर रोज देखने को मिल रही है। बेटी को दिखाने आए पुसगवां के राकेश एक घंटे से डॉक्टर का इंतजार करते दिखे। बोले- स्टाफ भी जानकारी नहीं देता कि डॉक्टर कितने बजे मिलेंगे।
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नहीं सुधरी पेयजल की समस्या
जिला अस्पताल में लंबे समय से मरीजों को पानी लेने के लिए सरकारी नलों पर भागना पड़ रहा है। उनका पानी भी ठीक नहीं है। उसकी गुणवत्ता और ज्यादा खराब है। कुछ नलों के आगे का फर्श पीला तक पड़ गया है। वहां साफ सफाई तक नहीं हो रही।
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इंजेक्शन लगाने तक सीमित है स्टाफ
अस्पताल का स्टाफ अपना रवैया नहीं सुधार रहा है। आज भी स्टाफ इंजेक्शन लगाने बोतल चढ़ाने तक सीमित है। इसके अलावा स्टाफ के कर्मचारी मरीजों की कोई मदद नहीं करते। उनका ब्लड टेस्ट, एक्स-रे कराना भी खुद तीमारदारों को करना पड़ रहा है। एक बार बोतल लगा दी तो हटाने भी नहीं जाते। जब तक तीमारदार न पुकारें तो मरीज भी नहीं देखते।
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मरीज बोले- बाहर की लिखी जा रही है दवा
जिला अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार असलम ने बताया कि डॉक्टर को मरीज को देखने आ रहे हैं लेकिन यहां पूरी दवा नहीं मिल रही है। मरीजों को बाहर से दवा लानी पड़ रही है। तीमारदार वीरेंद्र कुमार ने बताया कि उसकी बेटी पांच दिनों से भर्ती है। कभी उसे पूरी दवा नहीं मिली। कभी एक गोली नहीं है तो कभी दूसरी गोली नहीं है। इससे डॉक्टर बाहर की दवा लिख रहे हैं। यही हाल कादरचौक के असलम का था। बोले- जो दवाएं डॉक्टर ने लिखी हैं, वे बाहर ही मिलेंगी। यहां ये दवाएं नहीं हैं।
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जिला अस्पताल में लो वोल्टेज की समस्या है। जब तक वोल्टेज नहीं सुधरेंगे तब तक पंखे ठीक से नहीं चलेंगे। हम भी कई बार शिकायत कर चुके हैं। रही बात बाहर से दवा लिखने की तो मैं इस बारे में डॉक्टरों से बात करूंगा। बाहर की दवा लिखना सख्त मना है।
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- डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस जिला अस्पताल
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