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घटिया आयरन सुक्रोज इंजेक्शन मामले में नोटिस से आगे नहीं बढ़ी कार्रवाई

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अमर उजाला में दिसंबर 2020 में छपी खबर। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। स्वास्थ्य विभाग में नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार है। दवा घोटालों में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। अमर उजाला ने दिसंबर 2020 में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होने पर दिए जाने वाले आयरन सुक्रोज इंजेक्शन की गुणवत्ता की कलई खोली तो मालूम हुआ कि यह घपला भी 80.50 लाख से ज्यादा का है। बदायूं को अक्तूबर 2020 में इंजेक्शन की 23 हजार वॉयल दी गईं, इनकी एक्सपायरी मई 2021 में थी। अमर उजाला ने सच्चाई तो उजागर की पर अब तक कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो सका।
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2004 से 2006 के बीच जिले में हुए करोड़ों के दवा खरीद घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा लखनऊ ने रविवार को तत्कालीन तीन सीएमओ समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की तो अन्य घोटालों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दवा घोटाले में 18 साल के बाद सिर्फ एफआईआर हो सकी है। 2007 से 2012 के बीच हुए घोटालों में सिर्फ जांच चल रही है। 2020 में आयरन सुक्रोज इंजेक्शन के मामले में कार्रवाई आगे ही नहीं बढ़ रही। 2004 से 2006 तक हुए दवा घोटाले में आरोपी तत्कालीन सीएमओ डॉ. हरिराम, डॉ. एमपी बंसल, डॉ. सुधाकर द्विवेदी, तत्कालीन एसीएमओ डॉ. सीपी सिंघल, तत्कालीन फार्मासिस्ट अनुपम कुमार दुबे, आरबी यादव सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दवा सप्लाई करने वाली फर्म के स्वामी सुरेश चौरसिया का भी अता-पता नहीं है।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन ने बदायूं को अक्तूबर 2020 में आयरन सुक्रोज इंजेक्शन की 23 हजार वॉयल उपलब्ध कराई थीं। एक वॉयल की कीमत 350 रुपये से ज्यादा थी। गौर करने की बात यह है कि इस इंजेक्शन की एक्सपायरी तारीख मई 2021 थी। अधोमानक आयरन सुक्रोज की 15 हजार वायल स्वास्थ्य विभाग ने खपा दीं। इनकी कीमत 52.50 लाख से ज्यादा थी। जब अमर उजाला ने खुलासा किया तो इंजेक्शन का वितरण रोक दिया गया। औषधि प्रशासन विभाग की ओर से इंजेक्शन बनाने वाली हिमाचल प्रदेश के सोलन की एलाइंस बायोटेक कंपनी को सिर्फ नोटिस दिया गया। करीब 60.50 लाख के घोटाले से अब तक पर्दा नहीं उठ सका है।
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आयरन सुक्रोज इंजेक्शन की गुणवत्ता खराब पाई गई थी। जांच में इंजेक्शन अधोमानक पाया गया था। उस बैच के इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी। इंजेक्शन निर्माता हिमाचल प्रदेश के सोल न की एलाइंस बायोटेक कंपनी को नोटिस दिया गया था। करीब दो साल पुराना मामला है। जानकारी जुटाकर ही आगे कुछ बता सकता हूं।
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-नवनीत कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर
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