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आयरन सिरप अधोमानक...अफसर चिंता में, %बांटे तो बांटे कैसे%

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बदायूं। यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की ओर से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बांटने के लिए भेजी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठना बंद नहीं हो रहे। जिला अस्पताल में आधा दर्जन से ज्यादा अधोमानक दवाओं की सप्लाई करने के बाद पिछले महीने यूपीएमएससी ने पत्र भेजकर दवाओं का वितरण रोक देने को कहा था। अब आंगनबाड़ी केंद्रों को वितरण किए जाने वाले आयरन सिरप की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है। हालांकि यूपीएमएससी की ओर से अब तक आयरन फोलिक एसिड सिरप की गुणवत्ता के संबंध में कोई पत्र नहीं आया है, लेकिन बरेली में सिरप का एक बैच फेल हो जाने के बाद स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिरप वितरण को लेकर पसोपेश में हैं।
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यूपीएमएससी ने हाल ही में बदायूं समेत कई जिलों को आयरन सिरप की सप्लाई भेजी है। बदायूं को 1.85 लाख सिरप भेजे गए हैं। इन आयरन सिरप का आंगनबाड़ी केंद्रों को वितरण किया जाना है। यहां पांच साल तक के एनीमिया ग्रस्त अैर कुपोषित बच्चों को सिरप की एक सप्ताह में एक डोज दी जाती है। सिरप 52 सप्ताह तक पिलाया जाना है। पिछले सप्ताह आयरन सिरप की खेप जिला महिला अस्पताल स्थित ड्रग वेयर हाउस पहुंच गई थी। बदायूं के साथ बरेली को भी यूपीएमएससी ने आयरन सिरप भेजे थे। वहां सिरप का एक पूरा बैच अधोमानक पाया गया है। यूपीएमएससी ने इसके बाद बरेली में आयरन सिरप के संबंधित बैच का वितरण रोक देने के लिए कहा है। इस बारे में जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को पता लगा तो वे यहां सिरप के वितरण को लेकर पसोपेश में फंस गए हैं। यहां भी आयरन सिरप की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी यूपीएमएससी की ओर से सिरप की गुणवत्ता के संबंध में कोई पत्र नहीं आया है। अधिकारी इसका इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि जिले में करीब छह महीने में यूपीएमएससी की एक दर्जन से ज्यादा दवाएं अधोमानक पाई गई हैं। अब बरेली में हजारों सिरप की खेप गुणवत्ता के मामले में फेल हो जाने के बाद यहां फिलहाल सिरप का वितरण रोक दिया गया है।
पहले से था आयरन की दवाओं का पर्याप्त भंडार
स्वास्थ्य विभाग के पास आयरन संबंधी दवाओं का पहले से पर्याप्त स्टॉक था। सभी सीएचसी, पीएचसी पर महिलाओं और बच्चों को दवाओं का वितरण किया जा रहा है। इसके बावजूद 1.85 लाख आयरन सिरप की आपूर्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, यूपीएमएससी ने करीब छह महीने पहले जिले को आयरन की 58 लाख टेबलेट की आपूर्ति की थी। दिसंबर में भी जिले को बिना डिमांड 35 लाख आयरन टेबलेट भेज दी गईं। सीएमओ बदायूं ने पर्याप्त स्टॉक की बात कहते हुए 35 लाख टेबलेट लेने से साफ इंकार कर दिया था। इसके बावजूद यूपीएमएससी के अफसरों ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर दबाव बनाकर जिले को 19 लाख आयरन टेबलेट दे दी थीं।
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बोले बाल रोग विशेषज्ञ-
- बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता का कहना है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बड़ों के मुकाबले काफी कम होती है। अगर बिना डॉक्टर की सलाह के या फिर गलत दवाइयां दी जाती हैं तो उनके शरीर पर काफी प्रतिकूल असर होता है। आयरन सिरप के मामले में कहा जा सकता है कि अगर इसकी गुणवत्ता खराब है और बच्चों को पिलाया जाता है तो बच्चों के लिवर, किडनी, दिमाग, आंत पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। बच्चों के मामले में बड़ों से कहीं ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
यूपीएमएससी ने 1.85 लाख आयरन सिरप की आपूर्ति की है। पड़ोसी जिला बरेली को भी आयरन सिरप की आपूर्ति की गई थी। पता लगा है कि बरेली में सिरप का एक बैच अधोमानक पाया गया है। हालांकि, हमारे यहां उस बैच के सिरप नहीं हैं। फिर भी सिरप के वितरण में एहतियात बरती जा रही है। यूपीएमएससी से सिरप की गुणवत्ता संबंधी पत्र का इंतजार किया जा रहा है।
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- डॉ. मंजीत सिंह, सीएमओ
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