उझानी (बदायूं)। मानकपुर और देवरमई पूर्वी में बुखार से महिला समेत छह लोगों की मौत के बाद डीएम के हस्तक्षेप से जागे सेहत महकमे के अफसरों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर डेंगू की जांच के लिए किटें मुहैया करा दी हैं। स्थानीय स्तर पर ही बुखार और डेंगू के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने को अस्पताल कैंपस में 15 बेड का वार्ड तैयार कर लिया गया। इसके विपरीत एमओआईसी कैंपस के लुक में एक बार फिर मामूली परिवर्तन कर धन्वंतरि वाटिका के साथ आध्यात्म केंद्र का नाम हटा दिया गया है। पहले उसे आध्यात्म केंद्र का रूप दे दिया गया था।
पिछले महीने ओपीडी का स्थान परिवर्तन कर डॉक्टरों के लिए पुराने भवन में कक्ष आवंटित किए गए थे। एमओआईसी डॉ. महेश प्रताप सिंह ने प्रशासनिक भवन के मेनगेट के सामने बनी औषधीय पौधों की वाटिका के साथ ही आध्यात्म केंद्र नाम लिखवा दिया था। आध्यात्म केंद्र का नाम पिछले सीएमओ डॉ. मंजीत सिंह के निरीक्षण के बाद ही हटाया गया था। नई व्यवस्था के तहत अब पुराने भवन में बनी ओपीडी में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों के कक्ष, लैब, महिला, कुष्ठ और नेत्र रोगियों का दिखेंगे। साथ ही कैंपस में ही एक वार्ड को ज्वर/ डेंगू वार्ड का नाम दिया गया है। इसमें 15 मरीजों को भर्ती रखने की सुविधा है। ज्वर/ डेंगू वार्ड मानकपुर और देवरमई पूर्वी में बुखार से महिला समेत छह लोगों की मौतों के बाद अस्तित्व में आया है।
बता दें कि बुखार से मानकपुर में खालिद, फरमूदी, मोहम्मद सलम, कल्लू मुल्लाजी और अकील अहमद की मौत हो गई थी। इसके बाद ही डीएम कुमार प्रशांत, एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी और सीएमओ मंजीत सिंह ने मानकपुर का दौरा कर हालात का जायजा लिया था। गांव में गंदगी की शिकायत पर डीएम ने दोनों सफाई कर्मियों का सस्पेंड कर दिया था।
मानकपुर में दूसरे दिन भी चला सफाई अभियान
मानकपुर में बुखार के प्रकोप से ग्रामीणों को निजात दिलाने के लिए रविवार को भी ब्लॉक के एडीओ (पंचायत) डेरा डाले रहे। उनकी देखरेख में दूसरे दिन भी आसपास की ग्राम पंचायतों के 15 सफाई कर्मियों ने गलियारों साफ किया। नालियों से कीचड़ निकालने का भी काम किया गया। प्रधानपति शमशुल पहलवान ने बताया कि वह खुद सफाई व्यवस्था पर नजर रखे हुए हैं। जरूरत पड़ी तो बीडीओ से बात कर सफाई कर्मियों की संख्या में भी इजाफा कर दिया जाएगा।
...तो फिर स्वास्थ्य कर्मियों को जमा नहीं करने पड़ेंगे शैक्षिक प्रमाण पत्र
इलाके में जिस समय बुखार का प्रकोप बढ़ रहा था, उसी दौरान चिकित्साधीक्षक डॉ. महेश प्रताप सिंह ने एक आदेश जारी कर कहा था कि सभी स्वास्थ्य कर्मचारी अपने शैक्षिक प्रमाण पत्र अवलोकन के लिए उनके समक्ष प्रस्तुत करें लेकिन कर्मचारियों ने नये सिरे से शैक्षिक प्रमाण पत्र जमा करने से इंकार कर दिया था। कई दिन तक इसे लेकर पसोपेश का माहौल भी बना रहा। दो-तीन स्वास्थ्य कर्मियों को छोड़ अधिकतर ने प्रमाण पत्र जमा करने को इस तर्क के साथ मना कर दिया कि उनके शैक्षिक प्रमाण पत्र तो उसी दिन से विभाग के पास उपलब्ध हैं जब वह स्वास्थ्य सेवा में आए थे। ऐसे में फिर से शैक्षिक प्रमाण पत्र जमा करने का औचित्य भी नहीं बनता। इसके बाद चिकित्साधीक्षक ने नये सिर से प्रमाण पत्र जमा कराने का निर्णय भी वापस ले लिया है।
अस्पताल में ओपीडी के स्थान में परिवर्तन मरीजों की सुविधा के लिहाज से किया गया है। किसी भी कर्मचारी से शैक्षिक प्रमाण पत्र भी जमा नहीं कराया जाएगा। प्रमाण पत्र लेने के पीछे उनका मकसद उनके कार्य का आकलन कर उन्हें पुरस्कृत करने का था।
- डॉ. महेश प्रताप सिंह, चिकित्साधीक्षक