बदायूं। शुगर, हृदय रोग, पक्षाघात, ब्लड प्रेशर जैसी गैर संक्रामक बीमारियों से पीड़ितों को फिलहाल ओपीडी में ही धक्के खाने होंगे। इस तरह की बीमारियों से पीड़ितों को अलग से बेहतर इलाज की शासन की मंशा यहां छह महीने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। दरअसल, जिला अस्पताल में गैर संक्रामक बीमारियों (एनसीडी) से पीड़ितों के लिए अलग से क्लीनिक और लैब खोली जानी है, लेकिन बजट और स्टाफ मिलने के बाद भी यहां लैब और क्लीनिक नहीं खुल सका है।
एनयूएचएम (राष्ट्रीय अर्बन हेल्थ मिशन) के तहत करीब छह महीने पहले जिला अस्पताल में एनसीडी (नॉन कम्युनिकेबल डिसीज) क्लीनिक और लैब खोलने को हरी झंडी मिली थी। इनके लिए भवन जिला अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध कराना था। जिला मुख्यालय के बाद सीएचसी स्तर पर भी एनसीडी क्लीनिक और लैब खोली जानी हैं, लेकिन अब तक जिला अस्पताल में ही गैर संक्रामक बीमारियों से पीड़ितों को इसका लाभ मिलना शुरू नहीं हुआ है। जिले में अब तक ऐसे रोगियों को अलग से इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। शुगर, ब्लड प्रेशर, हृदय और पक्षाघात जैसी असंक्रमित बीमारियों से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में जिला अस्पताल आते हैं। इनको डॉक्टर के पास पहुंचने मेें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा मिल सके, इसके लिए एनसीडी क्लीनिक खोले जाने हैं। क्लीनिक और लैब खुलने के बाद गैर संक्रामक बीमारियों के मरीजों की जांचों के साथ इलाज भी अलग से हो सकेगा। लैब के मौजूदा स्टाफ पर दबाव कम हो जाएगा। इसके बावजूद जिला अस्पताल में एनसीडी क्लीनिक और लैब शुरू नहीं हो सकी है।
टीएमटी भी नहीं हो सकी शुरू
जिला अस्पताल में हृदय रोगियों को जांच के नाम पर फिलहाल ईसीजी की सुविधा ही मिल पा रही है। हालांकि, एमएलसी वसीम बरेलवी की निधि से हृदय रोगियों की जांच को टीएमटी मशीन भी लगाई गई है, लेकिन अभी इसने काम शुरू नहीं किया है।
एनसीडी क्लीनिक और लैब चालू होने की प्रक्रिया में है। कुछ स्टाफ भी मिल चुका है। लैब और क्लीनिक के लिए सीएमएस से जिला अस्पताल में भवन उपलब्ध कराने को कहा है। भवन जिला अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध कराना है। बाकी संसाधन आदि भी पूरे किए जा रहे हैं।
- डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ