बदायूं। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रांतीय आह्वान पर सोमवार को एंबुलेंस 102, 108 के चालक हड़ताल पर रहे। इसके चलते पूरा दिन एंबुलेंस के पहिये न घूमने से मरीजों को काफी दिक्कत हुईं। गनीमत यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और समय से इलाज न होने पर किसी की जान नहीं गई। हड़ताल से पुलिस-प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग के अफसरों में भी अफरातफरी रही। एंबुलेंस चालकों को मनाने की कवायद दिन भर चलती रही, लेकिन वह काम पर नहीं लौटे।
जिले में कुल 77 एंबुलेंस हैं। इनमें 41 एंबुलेंस 102, 34 एंबुलेंस 108 और दो लाइफ सपोर्ट हैं। एंबुलेंस के संचालन का जिम्मा निजी कंपनी जीवीके ईएमआरआई पर है। यही निजी कंपनी स्टाफ का वेतन भुगतान करती है। समान काम, समान वेतन की मांग को लेकर एंबुलेंस चालक पहले भी आवाज बुलंद कर चुके हैं। लेकिन उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जाता रहा। सोमवार को प्रांतीय आह्वान पर एंबुलेंस चालक हड़ताल पर चले गए। सुबह छह बजे से ही एंबुलेंस के साथ चालक दातागंज रेल क्रॉसिंग के पास स्थित मैदान में जुटना शुरू कर हो गए। सीएचसी, थाना और ब्लॉक स्तर पर तैनात सभी एंबुलेंस को चालकों ने मैदान में खड़ा कर दिया। एंबुलेंस चालकों का कहना था कि 2015 से उनके वेतन में वृद्धि नहीं की गई है। काम के घंटे भी निर्धारित नहीं हैं। जीवीके अधिकारियों को प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने कई बार समस्याओं के बारे में बताया, लेकिन उनकी मांगों को अनदेखा किया जाता रहा। ऐसे में मजबूरन उनको हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा।
निजी एंबुलेंसों संचालकों की रही चांदी
एंबुलेंस 102, 108 की हड़ताल के चलते जहां एक ओर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा, वहीं दूसरी ओर निजी एंबुलेंस के संचालकों की चांदी रही। सीएचसी-पीएचसी से जिला अस्पताल आने वाले बीमार लोगों को धन खर्च कर प्राइवेट एंबुलेंस व निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
42 लोगों ने की कॉल, नहीं मिली मदद
सोमवार को एंबुलेंस की हड़ताल के दौरान शाम तक जिले में अलग-अलग स्थानों से एंबुलेंस 102, 108 को मदद के लिए 42 लोगों ने कॉल कीं। इनको मदद नहीं मिल सकी। कॉल करने वालों में एंबुलेंस 102 की मदद ज्यादा मांगी गई। दरअसल, प्रसव के बाद प्रसूता को घर तक छोड़ने और बच्चे को टीका लगवाने के लिए अस्पताल लाने ले जाने की सुविधा भी एंबुलेंस 102 मुहैया कराती है। ऐसे में एंबुलेंस 102 की सेवाएं ज्यादा मांगी जाती हैं। एंबुलेंस 102, 108 के जिला समन्वयक रोहित यादव की मानें तो प्रतिदिन 24 घंटे में लगभग पांच सौ कॉल आती हैं। जिनमेें 102 की कॉल ज्यादा होती हैं। सोमवार को लगभग दस घंटे के दौरान 42 लोगों ने ही कॉल की।
एंबुलेंस चालकों की हड़ताल खत्म कराने की हरसंभव कोशिश की जा रही है। उच्च स्तर पर भी इस पर काम चल रहा है। सोमवार को हड़ताल के दौरान जिले में किसी स्थान से अप्रिय सूचना नहीं है। पूरा ध्यान रखा जा रहा है। सीएचसी, पीएचसी को निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों को जरूरी होने पर ही रेफर करें। जहां तक संभव हो, स्थानीय स्तर पर ही उनको बेहतर इलाज दें। स्वास्थ्य विभाग की निजी एंबुलेंस को भी लगाया गया है।
-डॉ. मंजीत सिंह, प्रभारी सीएमओ
एंबुलेंस चालकों की वेतन वृद्धि समेत कुछ मांगें उच्च स्तर पर लंबित हैं। इन्हीं मांगों के समर्थन में हड़ताल की गई है। आवश्यक सेवाओं को ठप करने पर सरकार ने एस्मा भी लागू किया है। हम स्थानीय स्तर पर हड़ताल खत्म कराने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। जल्द ही कोई बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद है।
- रोहित यादव, जिला समन्वयक- एंबुलेंस 102, 108