बदायूं। जिले में आयुष्मान भारत योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। इसकी कोई ठोस बाहरी वजह नहीं हैं, बल्कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही है, जिनकी वजह से यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। विभागीय अधिकारी कभी कभार कागजों मेें इस ओर ध्यान देेकर अपने कर्तव्य से इतिश्री कर लेते हैं, जिस वजह से योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। यहां स्थायी सीएमओ का न होना भी एक बड़ी दिक्कत बना हुआ है।
केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना का लाभ यहां अधिकांश लोगों को नहीं मिल पा रहा है। कार्ड धारक इलाज के लिए इधर उधर मारे फिर रहे हैं, लेकिन कोई भी उनकी पीड़ा की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। कार्ड धारक अधिकारियों के चक्कर काटने लगे हैं, लेकिन वहां से उन्हें कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिल पा रहा है। अधिकारी बस इस पर ध्यान दे रहे हैं कि कोई कुछ शिकायत न कर पाए। इसके लिए कागजों में योजना का काम लगातार कर रहे हैं। वास्तविकता तो ये है कि जिले मेें आयुष्मान योजना को फेल करने में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं, क्योंकि उनकी तरफ से जिस प्रकार योजना की मॉनीटरिंग होनी चाहिए, वह नहीं हो पा रही है। कोई भी डॉक्टरों से मिलकर उनकी परेशानी को खत्म करने का प्रयास नहीं कर रहा है। हर कोई जिम्मेदारी लेने की जगह भागने के प्रयास में लगा हुआ है। इधर जिले में पिछले कुुछ समय से स्थायी सीएमओ नहीं होने की वजह से योजना पर काफी असर देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि इस पर योजनाबद्घ तरीके से काम नहीं हो पा रहा है।
सस्पेंड हो चुके हैं सीएमओ
जिले में सीएमओ का चार्ज इस समय डॉ. मंजीत सिंह पर है। इससे पहले सीएमओ डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, लेकिन वह अपनी कार्यशैली के कारण हमेशा चर्चा मेें रहे। कार्य व मातहतों पर नियंत्रण में लापरवाही पर शासन ने पिछले दिनों उन्हें सस्पेंड कर दिया था। उसके बाद से यहां स्थायी तौर पर किसी सीएमओ की नियुक्ति शासन ने नहीं की।
योजना का जमकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। लोगों को समझाया जा रहा है, ताकि वे योजना का लाभ उठाएं। डॉक्टरों को भी इसके बारे में समझाया जा रहा है, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत इलाज कर सकें। वहीं स्थायी सीएमओ के न होने से भी योजना के क्रियान्वयन में दिक्कत आ रही है। होना यह चाहिए था कि सीएमओ के निर्देशन में तीन सदस्यीय टीम काम करती, जो डॉक्टरों से वार्ता करती और उनकी समस्याओं का समाधान करती, ताकि डॉक्टर इसमें रुचि लेते और योजना आगे बढ़ती।
नितिन वर्मा, जिला कोऑर्डिनेटर, आयुष्मान भारत