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नौ लाख से ज्यादा खर्च, फिर भी इलाज को तरस रहे लोग

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बदायूं। केंद्र सरकार की ओर से आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत करने के पीछे मंशा थी कि गरीब लोगों को भी बेहतर से बेहतर इलाज मुहैया कराया जा सके। इस साल विभाग की ओर से गरीबों के इलाज पर नौ लाख रुपये से अधिक खर्च किया है, लेकिन ये खर्च कहां और किन गरीबों के लिए इलाज के लिए हुआ, ये कह पाना संभव नहीं है। क्योंकि जहां इलाज पर 10 हजार रुपये खर्च हुए, वहीं उसका बिल 25 से 30 हजार रुपये दिखाकर सरकारी धनराशि को लूटने का काम किया गया। हालांकि धनराशि कितनी भी खर्च हुई, लेकिन कुछ चुनिंदा मरीजों को ही राहत मिली, जबकि अधिकतर लोग आज भी इलाज के लिए भटक रहे हैैं।
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आयुष्मान योजना की बात करें, तो विभाग के आंकड़ों में जिले में तीन सरकारी और आठ निजी अस्पताल संचालित है, लेकिन आठ में से पांच प्राइवेट अस्पताल काम छोड़ चुके हैं। एक लाख 36 हजार 367 कार्ड बनाए जा चुके हैं, साथ ही 65 हजार 191 लोगों के गोल्डन कार्ड भी बनाए गए हैं। लेकिन ये आंकड़े कागजों में ही अच्छे नजर आते है, जबकि हकीकत कुछ और है। लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीज अब इस बात से परेशान है कि किसी डॉक्टर के यहां पर कार्ड मान्य है, किस जगह पर कार्ड नहीं मान्य है। अब मरीजों को पहले अस्पताल की तलाश करानी होगी। उसके बाद में इलाज के बारे में डॉक्टरों से वार्ता की जाएगी। हालांकि विभाग की माने तो अब तक इस योजना के तहत डॉक्टरों को नौ लाख 53 हजार से अधिक का पेमेंट जिले में किया जा चुका है, लेकिन धरातल पर इस योजना का लाभ असल में सही लोगों को नहीं मिल पा रहा है।

डॉक्टर भी नहीं हैं पीछे योजना फेल कराने में
शासन की मंशा पर कुछ प्राइवेट डॉक्टर भी जमकर पानी फेर रहे है, जिसकी वजह से आम जनता को सरकार की इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि चयनित आठ निजी अस्पतालों में से सिर्फ तीन ही अस्पताल ये काम कर रहे हैं। पांच ये काम विभिन्न कारणों से छोड़ चुुके हैं। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि अगर तत्काल पेमेंट डॉक्टरों के खातों में आता रहे, तो डॉक्टर दूसरा काम न करें लेकिन देर से पेमेंट मिलने की वजह से डॉक्टरों ने काम को बीच में छोड़ दिया है।
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कार्ड है पर नहीं हो रहा इलाज
ब्लाक जगत के रहने वाले जगदीश को काफी समय से पेट संबंधी बीमारी है, लेकिन उसके पास में इतना पैसा नहीं है कि वह अच्छे प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा सके। उसके पास में कार्ड भी है, लेकिन मजबूरी है कि जिस प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया, वहां पर कार्ड मान्य नहीं है। ऐसे में उधार के रुपये को इलाज कराना मजबूरी बन गई है।

आयुष्मान भारत के तहत मरीजों का लगातार इलाज किया जा रहा है। लोगों को बेहतर से बेहतर सुविधा दी जा रही है। अभी तक नौ लाख रुपये से अधिक लोगों केे इलाज पर खर्च हो चुके हैं। आगे भी योजना से लोगों को लाभान्वित किया जाता रहेगा।
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-नितिन वर्मा, जिला कोऑर्डिनेटर आयुष्मान भारत योजना
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