संपूर्णानंद और आगरा विश्वविद्यालय से बीएड, बीए आदि की पढ़ाई करके शिक्षक बनने वालों की जांच एसआईटी ने शुरू कर दी है। एक अधिकारी ने यहां पहुंचकर वर्ष 2007 के विशिष्ट बीटीसी और 2008 में विशेष चयन में बने सभी शिक्षकों की पत्रावलियों को तलब किया है। सूत्र बता रहे हैं कि खुलासा हुआ है कि विशिष्ट बीटीसी और विशेष चयन के तहत बने कई शिक्षकों ने हाथ से बनी बीएड के साथ ही अन्य की मार्कशीट को भी लगाया है। उनकी बारीकी से जांच पड़ताल की जा रही है। एसआईटी का पूरा फोकस इसी पर है।
यहां बता दें कि प्रदेश के कई जिलों में फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए तमाम शिक्षकों ने नौकरी हासिल की है। शासन इस पर गंभीर है। शासन ने फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी हासिल करने वालों का पता लगाने को एसआईटी को लगाया है। शासन से निर्देश मिलने के बाद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डायट के प्राचार्य आनंद प्रकाश शर्मा ने जिले के सभी खंड शिक्षाधिकारियों के साथ तीन दिन पहले मीटिंग करके उन्हें शासन की मंशा से अवगत कराते हुए वर्ष 2007 में विशिष्ट बीटीसी और वर्ष 2008 में विशेष चयन के तहत बने उन सभी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की पत्रावलियों को तलब किया है जिन्होंने संपूर्णानंद विश्वविद्यालय और आगरा विश्वविद्यालय से बीएड, बीए आ फिर कोई अन्य डिग्री हासिल की है। इनके अलावा वर्ष 2010 से शिक्षामित्र से शिक्षक के पद पर समायोजित होने वाले शिक्षकों के साथ ही प्रशिक्षु शिक्षकों के भी रिकार्ड को मांगा गया है। एसआईटी के एक जांच अधिकारी ने बीते दिन यहां पहुंचकर उपरोक्त वर्षों में बने शिक्षकों के साथ ही वर्ष 2010 से अब तक जितने शिक्षक नियुक्त हुए हैं और उन्होंने उक्त महाविद्यालयों से डिग्री हासिल की है उनकी पत्रावालियों को मांगा।
सूत्रों ने बताया कि जांच अधिकारी से कहा गया है कि सभी शिक्षकों की पत्रावलियां संबंधित ब्लाक मुख्यालयों पर हैं। लिहाजा, उन्हें जुटाया जा रहा है। जांच अधिकारी का कहना था कि जिला मुख्यालय पर सारा रिकार्ड होता है। यदि समय से उन्हें पत्रावलियां मिल जाएं तो जांच का कार्य तेजी से शुरु हो जाएगा। सूत्र बता रहे हैं कि एसआईटी का विशेष फोकस उन प्रमाण-पत्रों पर है जिन्होंने हाथ से बनी मार्कशीटों को लगाया है। ऐसे शिक्षकों की संख्या काफी है।
एसआईटी की ओर से जांच चल रही है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक, विशेष चयन 2008 के शिक्षकों की पत्रावलियां मांगी गई हैं। तथ्य के रूप में यह भी बात सामने आई है कि इसमें कई शिक्षकों ने हाथ से बनी मार्कशीट भी लगाई हैं। आमतौर पर ऐसी मार्कशीट खो जाने की स्थिति में डुप्लीकेट बनाईजाती है। लेकिन अधिकांश संख्या में होना यह जांच का विषय है। इसकी विभाग की भी पैनी नजर है। ब्लॉक मुख्यालयों से पत्रावलियां मांगी गई हैं। - सोमनाथ विश्वकर्मा, प्रभारी बीएसए।