दातागंज। गांव पालिया गूजर में निर्माणाधीन नाले का काम कुछ प्रभावी लोगों ने रुकवा दिया, जिसकी वजह से चार गांव की करीब 600 बीघा में लगी फसलें जलभराव में डूब गईं हैं। बृहस्पतिवार को चारों गांवों के किसानों ने एसडीएम को शिकायती पत्र देकर नाला खुलवाने का अनुरोध किया।
किसानों का आरोप है की नाला शीघ्र नहीं खुला तो उनकी फसलें जलभराव से खेतों में सड़ जाएंगी। चार दिन हुई मूसलाधार बारिश से गांव के चारों तरफ पानी भरा हुआ है, जिसकी वजह से पलिया गूजर, कनकपुर, कांसी और कुढ़े गांव के किसानों के खेतों में जलभराव हो गया है। धान और बाजरा की लगभग 600 बीघा में लगीं फसलें दो-दो फुट पानी में डूब गई हैं।
किसानों का कहना है कि पानी की निकास के लिए ग्राम कुढे़ से लेकर पापड़ अरिल नदी तक काफी पुरानी लगभग तीन किलोमीटर लंबी एक नहर खोदी हुई है, लेकिन इस नहर के अधिकांश भाग पर कब्जा होने से नहर का औचित्य ही खत्म हो गया है। पानी के निकास के लिए पिछले दो दिन से पलिया गांव में जेसीबी मशीन से एक बड़ा नाला खोदा जा रहा था। कुछ प्रभावी लोगों ने अपने मकान के सामने खोदाई नहीं करने दी। इससे नाला निर्माण का काम रुक गया। बीते दिनों हुई बारिश मेें खेतों में हुए जलभराव के कारण फसलें डूब गई हैं।
इन लोगों का कहना है की एक नाला पहले से बना हुआ है। ग्राम प्रशासक धनदेवी ने बताया की काम पर रोक लगाने वाले एक परिवार ने दो-ढाई दशक पहले निजी तौर पर छोटा सा नाला बनवाया था, लेकिन अब वह नाला काफी नीचा होने के साथ पूरी तरह से बंद है।
खोदाई के दरमियान उसके कुछ अवशेष मिले हैं, ग्राम प्रशासक ने बताया कि लगभग 200 मीटर नाला खुद चुका है। मात्र 20 मीटर पर विवाद खड़ा कर दिया गया है। उन्होंने हल्का लेखपाल पर विवाद बढ़ाने का आरोप लगाया है।
एसडीएम विनोद कुमार सिंह ने बताया कि गांव में पार्टी बंदी के तहत इस मामले को तूल दिया जा रहा है, नाला निर्माण में विवाद खत्म करने के लिए नायब तहसीलदार के नेतृत्व में टीम गई थी। उसने अपने सामने खोदाई भी कराई। जिस जगह पर विवाद है यदि वह किसी की निजी संपत्ति नहीं है तो निर्माण कार्य नहीं रुकेगा।