बदायूं। गुलफाम बानगी है उस सिस्टम की जहां एक आम आदमी को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए अपनी जान दांव पर लगानी पड़ती है। गुलफाम ने भी यही किया। कोतवाली पुलिस ने एक न सुनी, सीओ डोडे में जेल भेजने की धमकी देने लगे तो गुलफाम ने मौत का रास्ता चुन लिया। एसएसपी ऑफिस में जाकर खुद को आग लगा ली। तब तंत्र में सुगबुगाहट हुई और रिपोर्ट दर्ज हुई। मगर, अफसोस जिस न्याय की आस में गुलफाम भटक रहा था अब वह इस दुनिया में नहीं रहा।
ई-रिक्शा चलाने वाले गुलफाम की मौत के बाद अब जिम्मेदारों को तलाशना जरूरी है। एसएसपी कार्यालय में आग लगाने के बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे बरेली भेजा जा रहा था। सिस्टम को भले ही उसका दर्द न दिखा हो, लेकिन जिस्म पर उधड़ी हुई खाल उसकी पीड़ा बया कर रही थी।
बता रही थी कि गुलफाम की आग दिखावटी नहीं है। गुलफाम उन लोगों पर कार्रवाई चाहता था जिन्होंने उसे पीटा। उसके रुपये व ई-रिक्शा लूट लिया। कोतवाली गया तो इंस्पेक्टर राकेश सिंह ने एक न सुनी। सीओ संजीव कुमार के पास गया तो कार्रवाई के बजाय सीओ उसे दो किलो डोडे में जेल भेजने की धमकी देने लगे, जबकि पुलिस चाहती तो मारपीट की एनसीआर दर्ज कर सकती थी। हद तो यह थी कि कोतवाली पुलिस व सीओ ने उसके प्रार्थना पत्र पर जांच तक नहीं कराई। (संवाद)
आबिद बोले- गुलफाम को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे लड़ाई
पुलिस की वजह से एक बार फिर विपक्ष को मुद्दा मिल गया। सूर्यकुंड की घटना का विवाद हाल ही में जैसे-तैसे निपटा है। मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया था। इसे ठंडा हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे कि गुलफाम की मौत ने सपा नेताओं को मुद्दा दे दिया। गुलफाम के मामले में सपा ने एक डेलीगेट्स बनाया है।
सपा सांसद एक्स पर लिखकर पहले ही सरकार को घेरने की कोशिश कर चुके हैं। हाल ही में पूर्व मंत्री आबिद रजा व अन्य सपा नेता गुलफाम से मिलने अस्पताल गए थे। रविवार शाम को गुलफाम का शव मीरा सराय में उसके घर आने के बाद आबिद रजा वहां पहुंचे। उन्होंने गुलफाम के माता-पिता से कहा कि वह उनकी हर संभव मदद करेंगे। मरने के बाद भी गुलफाम को न्याय दिलाया जाएगा। वह अधिवक्ताओं से संपर्क करके इंसाफ के लिए लड़ेंगे। उन्होंने कहा मरने से पहले गुलफाम ने जो बयान दिया था, उसी आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए।
नगर विधायक पर पुलिस के हाथ बांधने का आरोप लगा गया गुलफाम
गुलफाम ने आत्मदाह का प्रयास करने के बाद जिला अस्पताल में इंस्पेक्टर कोतवाली राकेश सिंह, सीओ सिटी संजीव कुमार व नगर विधायक महेश गुप्ता का नाम लिया था। कहा था कि नगर विधायक ने पुलिस के हाथ बांध दिए थे। इसलिए पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी। वहीं नगर विधायक महेश गुप्ता का कहना है कि वह तो गुलफाम को जानते तक नहीं। न ही गुलफाम व उसकी पत्नी की तरफ से किसी पुलिसकर्मी को फोन किया।
22 दिसंबर को हुई थी गुलफाम के साथ मारपीट
गुलफाम की दो साल पहले नहार खां सराय की सनोवर से शादी हुई थी। शादी के बाद दोनों में घरेलू विवाद रहने लगा। सनोवर मायके में रहने लगी थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के ऊपर मुकदमे भी दर्ज कराए। गुलफाम का कहना था कि 22 दिसंबर को ससुराल पक्ष ने उसके साथ मारपीट की। इसमें एक सभासद पति भी शामिल था। उसका ई-रिक्शा और नकदी छीन ली गई। इस मामले में गुलफाम ने सदर कोतवाल राकेश कुमार से लेकर सीओ सिटी रहे संजीव कुमार तक से शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, बल्कि पत्नी सनोवर की तहरीर पर पुलिस ने उल्टा गुलफाम पर ही रिपोर्ट दर्ज कर ली थी।
सीओ ने दी थी दो किलो डोडे में जेल भेजने की धमकी
गुलफाम का आरोप था कि जब उसने ससुरालियों के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी तो कार्रवाई की बजाय उसे बंधक बनाकर प्रताड़ित किया गया। जब सीओ संजीव कुमार से शिकायत की गई तो उन्होंने दो किलो डोडे में उसे जेल भेजने की धमकी दे डाली। आत्मदाह का प्रयास करने के बाद एसएसपी ने इस मामले में सदर कोतवाल राकेश सिंह को निलंबित कर दिया था। वहीं, सीओ को यहां से हटाकर बिसौली सर्किल भेज दिया था।
गुलफाम ने छह, सनोवर की तरफ से तीन मुकदमे कराए गए दर्ज
गुलफाम और सनोवर के बीच विवाद मार्च 2023 से शुरू हुआ था। बताते हैं कि गुलफाम पत्नी सनोवर को लेकर उसकी मौसी के यहां मुजरिया गया था। यहां दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। विवाद के दौरान गुलफाम के साथ ससुराल वालों ने मारपीट कर दी। इस विवाद में गुलफाम के खिलाफ मुजारिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके बाद से दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराते रहे। पत्नी व ससुराल पक्ष की तरफ से गुलफाम पर एक रिपोर्ट मुजरिया थाने में व दो मुकदमे सदर कोतवाली में दर्ज हैं। इसमें एक मुकदमा 30 दिसंबर 2024 को लिखा गया। आरोप है गुलफाम की तहरीर के बजाय उसकी पत्नी सनोवर की तहरीर पर पुलिस ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। इसके बाद गुलफाम और ज्यादा परेशान रहने लगा था।
वहीं गुलफाम की तरफ से पत्नी सनोवर व ससुराल वालों पर छह मुकदमे दर्ज कराए गए थे। गुलफाम ने मुजरिया थाने में एक, सिविल लाइंस थाने में दो तो सदर कोतवाली में तीन रिपोर्ट दर्ज कराईं थीं। इनमें से पांच मुकदमों में पुलिस ने पत्नी व ससुराल वालों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी है। तीन जनवरी को कोतवाली पुलिस ने गुलफाम के पिता की तरफ से रिपोर्ट दर्ज की।
इसमें गुलफाम के चार सालों को पुलिस गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है। गुलफाम की पत्नी समेत छह आरोपी अब तक फरार हैं। पुलिस ने गुलफाम की पत्नी सनोवर, साले निहाल, मुनाजिर, शाकिर, इसरार, इकरार के अलावा जैब, शाहरुख, दिनेश, सभासद पति रहीसउद्दीन के खिलाफ गाली-गलौज करने, जाने से मारने की धमकी देने व रंगदारी मांगने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस आरोपी निहाल, इसरार, शाकिर और इकरार को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। वहीं, पत्नी समेत छह आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
कब क्या हुआ
-22 अप्रैल 2023 को सबसे पहले गुलफाम के खिलाफ मुजरिया थाने में रिपोर्ट हुई थी।
-22 दिसंबर 2024 को गुलफाम के साथ हुई थी मारपीट और लूटपाट की घटना।
-24 दिसंबर को गुलफाम ने सदर कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ दी तहरीर।
-30 दिसंबर को सदर कोतवाली पुलिस ने उल्टा गुलफाम के खिलाफ दर्ज की रिपोर्ट।
-एक जनवरी को गुलफाम ने एसएसपी कार्यालय परिसर में आत्मदाह की कोशिश की।
-दो जनवरी को सदर कोतवाल राकेश सिंह व गणना के तीन सिपाहियों को किया गया निलंंबित।
-तीन जनवरी को सीओ सिटी संजीव कुमार को यहां से हटाकर बिसौली सर्किल भेजा।
-तीन जनवरी को गुलफाम की तहरीर पर कोतवाली में दस के खिलाफ दर्ज हुई रिपोर्ट।
-पांच जनवरी को पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा जेल।
-आठ जनवरी को पुलिस ने दो अन्य आरोपियों की गिरफ्तार कर भेजा जेल।
12 जनवरी को बरेली के निजी अस्पताल में गुलफाम ने तोड़ा दम