जिला ग्राम्य विकास अभिकरण की शासी निकाय (गवर्निंग बाडी) की बैठक साल में दो बार होनी चाहिए, लेकिन एक बार ही हो पाती है। जिला पंचायत अध्यक्ष की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में तमाम निर्णय लिए जाते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं पूनम यादव की अध्यक्षता में आयोजित उनके कार्यकाल में आखिरी गर्वर्निंग बाडी की बैठक अक्तूबर में हुई थी। इस बैठक के तमाम फैसलों को अभी तक लागू नहीं किया गया है। यह फैसले जिले के सभी जनप्रतिनिधि बैठक कर करते हैं। उन्हें आश्वस्त भी किया जाता है कि उनके फैसलों पर प्रशासन अमल करेगा। ऐसे में इस बैठक की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि पूर्व जिला पंचायत के कार्यकाल की आखिरी और इस सत्र की पहली शासी निकाय की बैठक में 6,348 इंदिरा आवासों को सर्व सम्मति से अनुमोदित किया गया, लेकिन बाद में 5,752 ही आवास रह गए। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों को जानकारी जानी है। पिछली बैठक में में भी विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट जन प्रतिनिधियों को उपलब्ध न कराने पर सदन में असंतोष किया गया था। उस समय सीडीओ प्रताप सिंह भदौरिया से अपेक्षा की कि भविष्य में ऐसा नहीं होना चाहिए। आज भी हालत यह हैं कि जनप्रतिनिधियों को विकास कार्यों की रिपोर्टें नहीं दी जाती हैं। नए पारित प्रस्तावों की जानकारी भी नहीं दी जाती है। यही वजह है कि पिछली शासी निकाय की बैठक में यह मुद्दा उठा था।
जन प्रतिनिधियों के उठाए मामले ठंडे बस्ते में
बदायूं। बिसौली विधायक आशुतोष मौर्य ने निजी नलकूपों के कनेक्शन धारकों को सामान न दिए जाने और स्टोर पर दलालों के सक्रिय होने पर नाराजगी जताई थी। इस संबंध में बैठक में ही अधीक्षण अभियंता को कठोर हिदायत दी गई थी। जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष ब्रजेश यादव ने बैंकों में दलालों के माध्यम से केसीसी बनाए जाने का मामला उठाया गया था। वहीं पूर्व एमएलसी भारत सिंह यादव ने टोंटपुर करसरी सहित बाढ़ से बचाव को खर्च रकम का हिसाब मांगा था। सांसद धर्मेंद्र यादव के प्रतिनिधि अवधेश यादव ने अजीविका मिशन और गरीबों की योजनाएं की प्रगति मांगी। इसमें अधिकतर मामले ठंडे बस्ते मेें पड़े हैं।
अधर में लटक गई वाईफाई सुविधा
बदायूं। सदन में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास किए जाने के साथ ही सभा कक्ष की साउंड व्यवस्था में सुधार को हरी झंडी दी गई। वहीं वुिकास भवन में वाईफाई सुविधा का प्रस्ताव शासी निकाय की बैठक में पास हुआ था, लेकिन इस ओर अभी तक कोर्ई कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
पीडी जिला ग्राम्य विकास अभिकरण रामरक्षपाल सिंह का कहना है कि शासी निकाय की बैठक में लिए गए सभी फैसलों से संबंधित अधिकारियों को बैठक में अवगत करा दिया गया था, बाद में भी इस संबंध में दिशा निर्देश दिए दे दिए गए थे। विभागीय जिम्मेदार प्रमुखों को इसके फैसलों को गंभीरता से लेना होगा। अन्यथा अगली बैठक में उन्हें जवाबदेह बनाया जाएगा।