जिस उद्देश्य को लेकर सालारपुर में औद्योगिक विकास क्षेत्र की स्थापना की गई थी, अब स्थित इंडस्ट्रियल एरिया को बदहाली के कगार पर है। जिले के औद्योगिक विकास का पहिया थमने के साथ रोजगार के अवसर भी सिमटते जा रहे हैं। प्रोत्साहनपरक योजनाओं के अभाव में उद्योगपतियों ने नए उद्योग स्थापित करने से हाथ खींच लिए हैं।
इंडस्ट्रियल एरिया में दो दशक पहले उद्योग स्थापित होने शुरू हुए। यहां उत्तर प्रदेश वित्त निगम और उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कारपोरेशन के वित्तीय सहयोग से इंडस्ट्रियल एरिया में सरिया फैक्ट्री, गत्ता फैक्ट्री, हैंडपंप प्लांट समेत करीब 43 उद्योग स्थापित हुए। बाद में उद्योगों को बिजली, कच्चे माल, ट्रांसपोर्ट और कुशल कारीगरों की कमी का ग्रहण लग गया। सरकार ने भी औद्योगिक विकास की ओर से मुंह मोड़ लिया। धीरे-धीरे प्रोत्साहनपरक योजनाएं बंद होती गईं। कई उद्योगपतियों ने सब्सिडी हड़प नीति अपना ली।
इसके साथ इंडस्ट्रियल एरिया की बदहाली का दौर शुरू हो गया। बदहाल इंडस्ट्रियल एरिया से उद्योगपतियों का मोहभंग होने लगा। करीब डेढ़ दशक में यहां 43 में से 21 औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं। बकाया अदा न करने पर आधा दर्जन से ज्यादा इकाइयों को उत्तर प्रदेश वित्त निगम और उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल कारपोरेशन ने अपने कब्जे में ले लिया। नए उद्योग स्थापित न होने से बदायूं की औद्योगिक विकास रफ्तार थम गई।
वर्जन-
नए उद्योग स्थापित कराने की दिशा में काफी काम हो रहा है। मैंथा शोधन केंद्र समेत कई उद्योग स्थापित हो रहे हैं। ब्राडगेज रेल लाइन शुरू होने से ट्रांसपोर्ट सुलभ हो जाएगा। इसका लाभ इंडस्ट्रियल एरिया को मिलेगी।
-वीरेंद्र कुमार, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र
ठोस पहले की जरूरत
जिले में बड़े उद्योगों की स्थापना के लिए जरूरी है कि ठोस पहल हो। बीस साल में औद्योगिक विकास के लिहाज से बदायूं की तरक्की थमी हुई है। -प्रकाश चंद्र गुप्ता
राजनेताओं ने की अनदेखी
इंडस्ट्रीयल एरिया की नेताओं ने अनदेखी की। बदायूं से मुलायम सिंह, मायावती, शरद यादव समेत कई नेता चुनाव जीते, लेकिन इंडस्ट्रियल एरिया की हालत नहीं सुधरी। - विपिन
रोजगार के अवसर भी सिमटे
इंडस्ट्रीयल एरिया की दुर्गति होने से रोजगार के अवसर भी सिमट गए हैं। इंडस्ट्रियल एरिया बदहाली का शिकार है। राजनेता इस दिशा में ध्यान नहीं दे रहे। -संजय मित्तल
सुधार में देरी से होगा नुकसान
इंडस्ट्रियल एरिया की हालत में सुधार में अगर देरी होती है तो और नुकसान होगा। जरूरी है कि इस दिशा में जल्द ठोस पहल की जाए। इससे विकास को गति मिलेगी। -प्रवीन सचदेवा