बदायूं। सड़कों पर घूमने वाले सांड़ अब उत्पात नहीं मचा सकेंगे। विभाग ने सांड़ों को पकड़कर गोशाला में रखने की तैयारी शुरू कर दी है। उसहैत में नंदी गोशाला तैयार हो चुकी है। गोशाला में इन सांड़ के खाने-पीने से लेकर बीमारियों तक का इलाज विभाग करेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों के हितों को ध्यान में रखकर प्रदेश के सभी जिलों में स्थाई और अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया था, साथ ही निर्देश दिए कि सड़क, खेतों में छुट्टा घूमने वाले गोवंश को पकड़कर उन गोशालाओं में रखा जाए। निर्देश मिलने के बाद प्रत्येक जनपद में काम शुरू हो गया। बदायूं में तैनात रहे डीएम दिनेश कुमार सिंह ने प्रदेश सरकार से मिले निर्देशों के क्रम में जिले में 699 गोशाला खुलवाईं थीं। उस वक्त उन गोशाओं में 6599 गोवंश को पकड़कर रखा गया था, लेकिन उस वक्त कुछ ग्रामीणों ने शुल्क देकर अपने गोवंश को गोशालाओं से छुुड़ा लिए। बाकी गोवंश उन्हीं पशुशाला में रहे, लेकिन शहर और ग्रामीण क्षेत्र में सांड़ों को नहीं पकड़ा गया, जिसकी वजह से वे लगातार लोगों पर हमला कर थे। ऐसे में लोगों ने इनको भी गोशाला में बंद कराने की मांग की। उसके बाद में स्थानीय स्तर पर प्रधान, सचिवों, ईओ ने सांड़ को भी उसमें रखना शुुरू कर दिया।
24 सिंतबर 2019 को उघैती क्षेत्र के गांव अमूपुर में गांव निवासी 50 वर्षीय राम सिंह अपनी फसल की रखवाली के लिए खेत पर जा रहे थे। वह गांव के बाहर पहुंचे ही थे कि इसी दौरान उन पर एक सांड़ ने हमला कर दिया। इसमें वह गंभीर घायल हो गए। परिजन ने उनका निजी डॉक्टर के यहां इलाज कराया, लेकिन कुछ घंटों बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके अलावा दातागंज और उसहैत में भी सांड़ के हमले से एक वृद्धा व एक युवक की मौत हो गई थी
उघैती क्षेत्र में एक सांड़ द्वारा वृद्ध पर हमला करने व वृद्घ की मौत के बाद में सभी जगहों से इन सांड़ को गोशालाओं से बाहर निकाल दिया गया। ऐसे में सड़कों पर दोबारा इनकी संख्या पहले की तरह ही दिखने लगी। इस पर डीएम कुमार प्रशांत के निर्देश पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने इन एक जगह एकत्र करने का प्लान तैयार किया। इसके बाद में उसहैत में बनी गोशाला में रखने का निर्णय लिया गया। इस पशुशाला का नाम विभाग के द्वारा नंदी गोशाला रखा है। इसमें केवल सांड़ रखें जाएंगे। विभाग के अनुसार इस नंदी गोशाला में करीब 150 सांड़ रह सकते हैं।