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ग्लेशियर टूटने से बह आई पहाड़ों की सिल्ट.. मटमैला हो गया गंगाजल

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उझानी (बदायूं)। उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से गंगा में बही पहाड़ों की सिल्ट का असर जिले के गंगा घाटों पर भी नजर आने लग गया है। गंगा का जलस्तर हालांकि बढ़ा नहीं लेकिन सिल्ट ने गंगाजल को मटमैला कर दिया। तीन दिन पहले तक स्वच्छ गंगाजल वसंत पंचमी वाले दिन मटमैला दिखा लेकिन बुधवार को भी सिल्ट ने कम होने का नाम नहीं लिया।
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ऋषिकेश के रास्ते गंगा में बहकर आगे बढ़ रही पहाड़ों की सिल्ट बुलंदशहर जिले में नरौरा बैराज तक पहुंच गई थी। बैराज से नहरों की तरफ उसका रुख इसलिए भी नहीं किया गया कि सिल्ट अगर नहरों में पहुंची तो सिंचाई विभाग को प्रवाह दुरुस्त रखने के लिए सफाई करानी पड़ेगी। उसका प्रवाह गंगा में ही बरकरार रखा गया। तीन दिन पहले कछला गंगाघाट पर इसका असर भी दिखा। गंगाजल धीरे-धीरे मटमैला होता चला गया। वसंत पंचमी वाले दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने इसे महसूस किया। बुधवार को भी गंगाजल पर सिल्ट का साया बरकरार रहा। श्रद्धालुओं में हरीओम और नेत्रपाल ने बताया कि डुबकी लगाते समय भी सिल्ट ने परेशानी में डाले रखा।
बता दें कि उत्तराखंड के चमोली जिले में सात फरवरी को ग्लेशियर टूटे थे। इसी के साथ ऋषि गंगा में पानी के प्रवाह के साथ पहाड़ों की सिल्ट भी बही थी। तपोवन इलाके में भारी तबाही के साथ ही वहां के दो पावर प्रोजेक्ट पर काम करने वालों के साथ करीब दो सौ से अधिक लोग लापता हो गए। अब तक 50 से अधिक शव भी बरामद हो चुके हैं। हादसे के बाद ही बिजनौर, बुलंदशहर, बदायूं, फर्रुखाबाद और कानपुर जिले में गंगा किनारे के इलाकों में अलर्ट कर दिया गया था लेकिन गंगा के जलस्तर से वृद्धि नहीं होने से प्रशासन ने भी राहत महसूस की थी। गंगाघाट के पास के लोगों में ओमप्रकाश और नरेंद्र ने बताया कि गंगाजल मटमैला होने से श्रद्धालुओं की आवाजाही पर प्रभाव भी पड़ा है। फिर भी आसपास के बाशिंदे खुश इसलिए हैं कि गंगा में जलस्तर बढ़ता तो नुकसान ज्यादा होता।
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फर्रुखाबाद और कानपुर तक सिल्ट पहुंचने के आसार
उझानी। गंगा के रास्ते बहकर निरंतर आगे बढ़ रही पहाड़ों की सिल्ट की रफ्तार काफी धीमी बताई गई है लेकिन जलस्तर का प्रवाह इसी तरह चलता रहा तो एक-दो दिन में फर्रुखाबाद और फिर आगे चलकर कानपुर जिले तक इसका असर दिखाई दे सकता है। जानकारों की मानें तो गंगा का प्रवाह थोड़ा धीमा पड़ा तो सिल्ट गंगा की तलहटी में जम जाएगी। ऐसी संभावना अधिक बताई जा रही है। बताते हैं कि केदारनाथ हादसे के बाद जब गंगा में जलस्तर बढ़ा तो पहाड़ों की सिल्ट प्रयागराज तक पहुंच गई थी। उस वक्त गंगा का प्रवाह काफी तेज था। इसलिए जल को साफ होने में ज्यादा समय लग गया था।
ग्लेशियर टूटने के बाद हाल ही में गंगा में चार हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। चूंकि पीछे बैराजों और डैम में जलस्तर बढ़ गया था। सिल्ट में भी इजाफा होने लगा था। पानी छोड़े जाने की वजह से गंगा में सिल्ट आने से गंगाजल मटमैला हो गया है। गंगा का जल साफ होने में थोड़ा समय लगेगा। - उमेश चंद्र, एक्सईएन, बाढ़ खंड
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