दातागंज (बदायूं)। गोबर डालने के लिए जाती महिला के पीछे-पीछे आ रही उसकी दो साल की बेटी अनन्या की पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। सड़क किनारे इस दो मीटर गहरे गड्ढे में बच्ची को गिरता देखकर आसपास के लोगों ने महिला को आवाज भी लगाई, मगर वह सुन नहीं पाई। बाद में कुछ लोगों ने दौड़कर बच्ची को गड्ढे से निकाला। उसे दातागंज सीएचसी ले जाया गया, लेकिन डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
गांव अंधरऊ निवासी दिनेश मथुरा में मजदूरी करते हैं। कई दिनों से वह वहीं हैं। शनिवार अपराह्न तीन बजे उनकी पत्नी संगीता गोबर डालने गांव के बाहर जा रही थीं। तभी उनकी दो वर्षीय सबसे छोटी बेटी अनन्या पीछे-पीछे चल दी। बेटी के पीछे आने का अहसास संगीता को नहीं था। वह घर से कुछ आगे बढ़ी थीं कि अनन्या के पैर लड़खड़ा गए और सड़क किनारे गड्ढे में गिर गई।
यह गड्ढा ग्रामीणों की लापरवाही से इतना गहरा हुआ है। ग्रामीण सड़क किनारे के इसी गड्ढे के सहारे सरकारी नलकूप का पानी अपने खेतों तक पहुंचाते हैं। लगातार पानी भरे रहने से गड्ढा जानलेवा बन गया। इधर, बच्ची के पिता दिनेश को मथुरा में सूचना दे दी है, वह वहां से चल दिए हैं। दिनेश के आने के बाद ही बच्ची का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पानी खेतों तक ले जाने के कारण सड़क किनारे बन गया था मौत का गड्ढा
- सड़क किनारे खाई के जरिये किसान नलकूप का पानी अपने खेतों तक ले जाकर करते हैं सिंचाई
- लगातार पानी भरा रहने की वजह से खाई करीब 100 मीटर लंबी और पांच मीटर चौड़ी बन गई
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। मां के पीछे-पीछे चलने के दौरान दो वर्ष की अनन्या की सड़क किनारे बने गहरे गड्ढे में गिरकर मौत होने के मामले में बड़ी लापरवाही सामने आई है। सड़क किनारे जिस गड्ढे में अनन्या गिरी, उस गड्ढे को और जानलेवा बनाने के लिए ग्रामीणों का ही हाथ रहा है। ग्रामीण सड़क किनारे के इसी गड्ढे के सहारे सरकारी नलकूप का पानी अपने खेतों तक पहुंचाते हैं। लगातार पानी भरे रहने से गड्ढा गहरा होता गया।
अंधरऊ गांव से निकलते ही हाशिमपुर रोड सरकारी नलकूप है। ग्रामीणों के अनुसार, करीब सड़क किनारे खाई (गड्ढा) के माध्यम से किसान नलकूप का पानी अपने खेतों तक ले जाकर सिंचाई करते हैं। सालों से खाई के माध्यम से सिंचाई करने की वजह से खाई और गहरी होती चली गई। अब यह खाई करीब 100 मीटर लंबी और चार-पांच मीटर चौड़ी बन गई। इसकी गहराई दो से तीन मीटर हो चुकी है। सिंचाई होने के कारण इस गड्ढे में हर समय पानी भरा रहता है।
इस कारण हादसा होने की आशंका बनी रहती है, लेकिन हादसा हो सकता है इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। शनिवार को हुए हादसे ने ग्रामीणों को भी झकझोर दिया है। मासूम बच्ची की मौत ने ग्रामीणों के साथ ग्राम पंचायत और ब्लॉक के अफसरों की अनदेखी भी उजागर की है। इस समस्या को समाधान के बारे में अब नहीं सोचा गया तो यह गड्ढा और बड़ा हो जाएगा। गांव के पास होने से इसमें बच्चों के गिरने का खतरा बना रहेगा।
चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी अनन्या
दिनेश के चार बच्चों में सबसे छोटी बच्ची थी। बच्ची की मौत के बाद दो बेटी एक बेटा रह गए हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव की महिलाओं ने किसी तरह संगीता को संभाला।
दातागंत के गांव अंधरऊ में बच्ची ची मौत के बाद रोता-बिलखता परिवार। संवाद