बदायूं। पावर कॉरपोरेशन में कुछ दिनों पहले लाखों का घोटाला सामने आया था। दर्जनों उपभोक्ताओं के बिल जमा कराने के नाम पर उनसे नकदी लेकर विभाग में फर्जी चेक लगा दिए गए थे। शिकायत मिलने पर सिविल लाइंस पुलिस ने तीन लोगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बावजूद न तो बिलिंग एजेंसी ने और न ही पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की थी। अब लखनऊ मुख्यालय स्तर से तीन सदस्यीय समिति गठित कर घोटाले की जांच शुरू कर दी गई है।
सिविल लाइंस थाना पुलिस ने 11 अक्तूबर को पावर कॉरपोरेशन के कार्यालय में पहुंचकर तीन लोगों को रंगेहाथ रुपयों का हेरफेर करते पकड़ा था। तीनों बिलिंग एजेंसी के माध्यम से उपभोक्ताओं के बिल जमा करने का काम करते थे। आरोप है कि जो उपभोक्ता नकद धनराशि लेकर बिल जमा करने आते थे, ये लोग उनकी नकद धनराशि लेकर उतने ही रकम का फर्जी चेक बनाकर उनके बिल में लगा देते थे। चेक बाउंस होने के कारण उपभोक्ताओं के बिल जमा नहीं हो पाते थे। उनका पिछला बिल अगले बिल में जुड़कर आता था। इस तरह तीनों लोग बिलिंग एजेंसी के कुछ अन्य लोगों की मदद से लाखों रुपये हजम चुके थे। जब ऐसे मामलों की शिकायतें आईं तो एक्सईएन वाईएस राघव ने पुलिस को सूचना देकर तीनों युवकों को पकड़वा दिया थे। पुलिस तीन दिन तीनों लोगों को थाने में बैठाए रही लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। उसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
खासबात ये रही कि न तो बिलिंग एजेंसी और न ही पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने की जहमत उठाई थी। तब से मामला ठंडा पड़ा था। अब इस मामले की जांच को लखनऊ स्तर से तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसमें अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार, अधिशासी अधिकारी वाईएस राघव और लेखाधिकारी डिवीजन फर्स्ट मुकेश कुमार शामिल किए गए हैं। बहरहाल ये समिति अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। टीम ने जांच शुरू करने की बात कही है।
इस मामले की जांच को लखनऊ से तीन सदस्यीय कमेटी गठित हुई है। जिन लोगों ने उपभोक्ताओं के रुपयों का गबन किया है, उन्होंने कुछ लोगों के रुपये वापस कर उनका बिल भी जमा करा दिया है। जबकि कुछ लोग अभी शिकायत करने आए ही नहीं है। बाकी मामले की जांच की जा रही है। - वाईएस राघव, एक्सईएन प्रथम, पावर कॉरपोरेशन