कछला में पितरों को जलदान करते लोग। संवाद
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उझानी / कछला (बदायूं)। पितृपक्ष पूर्णिमा पर हजारों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाकर पितरों का पूजन किया। उन्हें तृप्त करने के लिए पहले जलदान किया गया, फिर घाट पर ही कई परिवारों ने प्रतिपदा का श्राद्ध भी कराया। दोपहर बाद तक चले धार्मिक कार्यक्रम के दौरान पुरोहितों को दक्षिणा भेंट की गई।
गंगाघाट पर पितरों को जलदान का सिलसिला सूर्योदय के साथ शुरू हो गया। तड़के से घाट पर पहुंचने लगे लोगों ने आस्था की डुबकी लगाने के बाद कुश धारण कर पितरों को जलदान किया। अधिकतर लोगों ने पितरों की तृप्ति के लिए पुरोहितों के जरिये पहले धार्मिक अनुष्ठान कराए। जौ और काले तिल का भी धार्मिक मान्यता के अनुरूप इस्तेमाल किया गया।
प्रात: 10 बजे से घाट पर खासी भीड़ रही। गंगा किनारे के चारों घाटों पर बदायूं समेत आसपास जिलों के लोग भी जलदान के लिए पहुंचे।
पुरोहित हरिओम दास शास्त्री ने बताया कि गंगाघाट पर जलदान करने का विशेष महत्व है। पूर्णिमा पर ही प्रतिपदा रही, सो लोगों ने पूरी आस्था से प्रतिपदा का श्राद्ध भी कराया।
घाट पर पुलिस, नगर पंचायत और राजस्व कर्मियों की ओर से व्यवस्थाएं की गईं थीं। पुलिस ने हादसे की आशंका के चलते नावों पर प्राइवेट गोताखोरों को लगा रखा था। नाविकों और गोताखोरों ने लोगों को गहराई वाले स्थानों की ओर नहीं बढ़ने दिया।
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पूर्णिमा पर भी विसर्जित की गणेश मूर्तियां
कछला गंगाघाट पर शनिवार को भी एक दर्जन से अधिक टोलियों ने गणेश मूर्तियां विसर्जित कीं। छोटी मूर्तियों का जल प्रवाह किया गया तो बड़ी मूर्तियों का भू विसर्जन किया गया। नगर की कश्यप बस्ती से गणेश भक्तों ने विसर्जन से पहले शोभायात्रा भी निकाली। शोभायात्रा में गणेश भक्तों ने एक-दूसरे पर गुलाल उड़ाया। टोली में शामिल भक्त गाजे-बाजे के साथ गंगाघाट तक गए। इसके अलावा बिसौली, बदायूं और कासगंज में सोरों के भक्तों ने भी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कराया।