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Budaun News: कछला में गंगा खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर

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सहसवान में गंगा-महावा तटबंध से सटकर बहता गंगा का पानी। स्रोत प्रशासन - फोटो : samvad
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बदायूं। कछला में गंगा का जलस्तर 162.61 मीटर पर पहुंच गया है। गंगा अब खतरे के निशान से 22 सेमी ऊपर बह रही है। सहसवान और दातागंज तहसील में गंगा और रामगंगा का जलस्तर शनिवार की सुबह तक बढ़ा रहा। बाद में जलस्तर में कुछ कमी आई, लेकिन बाढ़ का कहर अभी कम नहीं हुआ है।
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उधर, सहसवान में जीएम तटबंध टूटने का खतरा कम नहीं हुआ है। गंगा यहां तेजी से कटान कर रही है। शुक्रवार से यहां बाढ़ खंड के अधिकारी बचाव कार्य में लगे हुए हैं। बचाव कार्य अब भी जारी है। बांध के सुरक्षा क्षेत्र के गांव खाली करा दिए गए हैं। यहां बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है।

मठकोरा गांव में रामगंगा का पानी मकानों से टकराने से खतरा बढ़ा
दातागंज में रामगंगा का फैलाव अधिक होने और तहसील क्षेत्र जिले का सबसे निचला इलाका होने के कारण यहां नावों और स्टीमर से लोगों को गांवों तक सहायता पहुंचाई जा रही है। कुंडरा मजरा गांव के सभी रास्ते बंद हो गए हैं, केवल एक रास्ता ही खुला हुआ है। मठकोरा गांव में रामगंगा का पानी मकानों की दीवारों से टकरा रहा है, जिससे मकानों के गिरने का खतरा पैदा हो गया है।
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नरौरा डैम से गंगा में दो लाख क्यूसेक से अधिक छोड़ा गया पानी
नरौरा डैम से गंगा में शनिवार को 12 बजे 2,21,804 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे गंगा में बाढ़ के हालात बिगड़ सकते हैं। हालांकि प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। सहसवान क्षेत्र में जीएम बांध की सुरक्षा को लेकर प्रशासन चिंतित है। राहत की बात यह है कि ऊपर की ओर बिजनौर डैम से 1.14 लाख क्यूसेक और हरिद्वार डैम से 1.06 लाख क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया है। अगर, ऊपर के डैम से डिस्चार्ज इससे अधिक होता तो आगे भी पानी बढ़ने की आशंका रहती।

गंगा-महावा तटबंध तीन से पांच फुट तक कटा


सहसवान। पिछले 24 घंटे में पानी ने गंगा-महावा तटबंध को कई जगहों पर तीन से पांच फुट तक काट दिया है। पानी के तेज बहाव के चलते तटबंध का करीब 150 मीटर का हिस्सा प्रभावित है। बाढ़ खंड दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और मजदूरों के जरिये तटबंध को बचाने में जुटा हुआ है।
पेड़ों की डालियां, तिपाई, बालू की बोरियां, यूकेलिप्टस के बल्ले डालकर बचाव कार्य कराया जा रहा है। तहसील प्रशासन इसमें बाढ़ खंड का सहयोग कर रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार देर शाम बांध कटना शुरू हुआ था। रात भर बचाव कार्य जारी रहा। कटान स्थल के सामने बांध की सुरक्षित साइड में बसे गांवों से ग्रामीणों को हटाए जाने का सिलसिला जारी है। लोग अपना घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हैं।
शनिवार को नरौरा बैराज से गंगा में दो लाख 21 हजार 804 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से यहां तटबंध कटने का खतरा मंडरा रहा है। गंगा महावा तटबंध के अंदर के गांवों में वीर सहाय नगला, खागी नगला, गिरधारी नगला, भमरौलिया में अब भी पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों को अभी जलभराव से होने वाली परेशानियों से कोई राहत नहीं मिली है। संवाद

छह सेमी पानी और बढ़ा तो चार गांवों में और बढ़ जाएगा खतरा
उसहैत। क्षेत्र के गांव जटा, प्रेमी नगला, ठकुरी नगला, जसवंत नगला गांवों के रास्ते डूब जाने के कारण मार्गों के दाेनों ओर बांस लगाकर लाल झंडियां लगा दी गईं हैं। इन्हीं के सहारे इन गांवों में आवागमन जारी था। बाढ़ खंड के अधिकारियों के अनुसार, अगर, छह सेमी भी गंगा का पानी बढ़ा तो इन गांवों के भीतर पानी भर जाएगा। इन गांवों में पानी कम होने पर गांव के जो लोग गांव में पहुंच गए थे, पानी बढ़ जाने पर वापस सहायता कैंपों में आ गए हैं। ग्रामीणों के 30-35 पशु अब भी गांवों में ही फंसे हुए हैं। क्षेत्र के 18 गांव समेत जिले के 26 गांव पानी से घिरे हुए हैं। संवाद

रामगंगा : कुंडरा गांव पानी से घिरा,
नवादा के स्कूल तक पहुंचा पानी
- बाजरा, तिल और उर्द की फसल हुई तबाह
संवाद न्यूज एजेंसी
दातागंज। नगरिया खनू के पूर्व प्रधान श्रीकृष्ण सिंह ने बताया कि रामगंगा में सुबह पानी तेजी से बढ़ रहा था, लेकिन फिलहाल पानी बढ़ने के हालात नहीं हैं। नवादा वदन की प्रधान भानुप्रिया सिंह ने कहा है कि उनके गांव में प्राथमिक स्कूल के पास पानी भर गया है। गांव के किसानों की करीब साढ़े तीन सौ बीघा जमीन में बाजरा, उर्द और तिल की फसल थी, जो पूरी तरह से पानी ने खत्म कर दी है।
कुंडरा मजरा के प्रधान तपन सिंह के अनुसार, उनके गांव के सभी रास्तों पर पानी भर गया है। केवल गड़िया रंगीन के रास्ते से ही गांव में प्रवेश कर सकते हैं। शेरपुर, हर्रामपुर, नगरिया खनू, नवादा वदन में नावों को लगाया गया है। ताकि पीड़ितों की समय पर सहायता की जा सके।

बाढ़ से घिरे गांव की महिला ने बरेली में दिया बच्ची को जन्म
दातागंज। क्षेत्र का गांव मठकोरा बाढ़ से घिरा हुआ है। तीन दिन पहले इस गांव के निवासी नन्हे कश्यप की पत्नी भारती को प्रसव पीड़ा हुई। गांव के लोगों ने नाव की सहायता से उन्हें गांव से निकाला। दातागंज में चिकित्सकों ने उनकी बिगड़ी हालत को देखते हुए हाथ खड़े दिए, तब उन्हें बरेली ले जाया गया, जहां एक प्राइवेट अस्पताल में उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समय जब पानी ज्यादा है, ऐसे में अगर उनकी हालत खराब होती तो उन्हें बाढ़ ग्रस्त इलाके से निकाल पाना और उनकी जिंदगी बचाना मुश्किल भरा होता। संवाद

सहसवान में गंगा-महावा तटबंध से सटकर बहता गंगा का पानी। स्रोत प्रशासन- फोटो : samvad

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