रामगंगा कटान से सिमरिया में स्कूल के बाद पंचायत घर भी कटा
सहसवान क्षेत्र में जीएम बांध पर शरण लिए हैं कई गांवों के लोग
गंगा और राम गंगा का पानी पिछले एक पखवाड़े से उथल-पुथल मचाए हुए है। हालत ये है कि दोनों नदियां कम-बढ़ हो रहे पानी के कारण किनारों पर जबर्दस्त कटान कर रही हैं। गंगा का पानी जहां सहसवान क्षेत्र के कुछ गांवों में भरा हुआ है तो रामगंगा के पानी की तेज धार ने तहसील दातागंज के गांव सिमरिया में कटान का कहर बरपा रखा है। यहां आधा स्कूल काटने के बाद रामगंगा ने पंचायत घर को भी निशाना बना डाला है। कई ग्रामीणों के घर भी क टान की जद में हैं। ग्रामीण अपने मकानों की कढ़ी, दरवाजे और चौखट आदि निकाल रहे हैं।
गंगा में एक बार फिर पानी बढ़ गया है। रविवार को कछला गंगा घाट पर गंगा का जलस्तर मीटरगेज पर 163.50 रहा, जबकि शनिवार को जलस्तर मीटरगेज पर 163.40 था। अब गंगा का जलस्तर ऊपरी डैमों की रिपोर्ट के आधार पर कम होने लगेगा। नरौरा डैम का डिस्चार्ज रविवार को 1,20,866 क्यूसेक रहा। बिजनौर डैम से 1,13,895 और हरिद्वार डैम से 61,995 क्यूसेक निकासी रही। सहसवान में बांधों के समीप के कुछ गांवों में जहां पानी भरा हुआ था। उन गांवों के ग्रामीण गंगा महावा बांध पर शरण लिए हुए हैं।
दातागंज। तहसील क्षेत्र के गांव सिमरिया में रामगंगा में कटान जारी रखा है। इस गांव में करीब एक पखवाड़े से कटान हो रहा है। पानी के घटाबढ़ी के चलते कटान में प्राथमिक विद्यालय के बाद अब पंचायत घर का आधा भाग कटान की जद में आ गया है।
रामगंगा में शनिवार को पानी बढ़ा था और मीटरगेज पर रामगंगा का जलस्तर 160.420 था जो आज केवल 160.210 रह गया है। इधर, कटान के चलते गांव सिमरिया के प्रधान पति ओमपाल का कहना है कि रामगंगा का पानी जहां के तहां बना हुआ है और कटान कर रहा है। उन्होंने बरेली बाढ़ खंड के माप को गलत करार दिया है और कहा है कि जानकारी क्षेत्र को सही नहीं किल पा रही है।
हाल ही में गांव के ध्यानपाल, रघुराई, प्रेमपाल, जगपाल, धर्मपाल, धवले, सत्यपाल, सुखपाल आदि के मकानों पर रामगंगा टकरा रही है और कटान कर रही है। ये लोग अपने मकान से सामान निकाल चुके हैं और छत की कढिय़ा, खिड़की दरवाजे भी रामगंगा में डूबने से बचाने में लगे हैं। प्राथमिक विद्यालय का आधा भाग और शौचालय तो नदी में पहले की समा चुका है और अब पंचायत भवन कट रहा है। इसका काफी भाग ध्वस्त होकर रामगंगा के पानी में डूब गया है।
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ध्यान नहीं दे रहे बाढ़ और प्रशासन के अधिकारी
बाढ़ खंड के अधिकारियों और प्रशासनिक आकिारियों के पास गांव बचाने की गुहार लगाते हुए प्रधान पति ओमपाल थककर निडाल हो गए हैं लेकिन कोई असर नहीं पड़ा है। असर, केवल इतना हुआ है कि कुछ अधिकारी गांव की हालत देखभर लौट गए। किसी ग्रामीण को कोई राहत नहीं मिल रही है।