बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग और एनजीओ के बीच आपसी जंग ने हॉट कुक्कड़ योजना पर ग्रहण लगा दिया है। पिछले साल नवंबर महीना तक एनजीओ ने सेंटरों पर हॉट कुक्कड़ मुहैया कराया। खामियां उजागर हुईं, तो विभाग ने जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली, लेकिन वह मार्च से आगे नहीं बढ़ पाया। एक महीना पहले से नौनिहालों से मुंह से हॉट कुक्कड़ छीन लिया गया है।
आंगनबाडी केंद्र पर पंजीकृत नौनिहालों के लिए हॉट कुक्कड़ योजना बाल विकास एवं पुष्टाहार ने शुरू की थी। नौनिहालों को हॉट कुक्कड़ सेंटर पर मुहैया कराने के लिए विभाग ने एनजीओ के जरिए काम कराया था, लेकिन खामियों की वजह से शासन ने एनजीओ से काम छीन लिया। सबसे बड़ी शिकायत गुणवत्ता और बेवक्त हॉट कुक्कड़ मुहैया कराने की रही थी। विभाग पर एनजीओ का बकाया भी हो गया। हालांकि शासन ने एनजीओ से काम अपने हाथ में लेकर नवंबर से मार्च तक प्रति बच्चा छह रुपये की दर से हॉट कुक्कड का वितरण कराया, लेकिन अप्रैल महीना के लिए बजट में धनराशि नहीं मिली।
विभागीय सूत्रों की मानें तो बकाया धनराशि को लेकर एनजीओ ने कोर्ट की शरण ले रखी है। एनजीओ को ही व्यवस्था सौंपे या फिर विभाग खुद हॉट कुक्कड़ का वितरण कराएं, इसी पसोपेश में विभाग बजट में धनराशि की बंदोबस्त नहीं कर पाया। अप्रैल बीत जाने के बाद चूंकि मई शुरू हो चुकी है, लेकिन आंगनबाडी केंद्रों पर नौनिहाल हॉट कुक्कड़ से वंचित हो गए हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि एनजीओ और विभाग के बीच कोर्ट में मामला निस्तारित होने तक हॉट कुक्कड़ योजना प्रभावित रहेगी। तब तक बच्चों को पुष्टाहार पर ही निर्भर रहना पड़ेगा।
अभी बजट का अभाव है, जैसे ही बजट आ जाएगा, योजना के तहत वितरण शुरू करा दिया जाएगा। - निर्मल कुमारी, डीपीओ।