पहले भी कटौती कर किसानों को लूटती रही थीं क्रय एजेंसीज
गेहूं खरीद का लक्ष्य मिलने के बाद ही खरीद हो सकती है शुरू
कागजों में 115 क्रय केंद्र घोषित, अभी कोई क्रय केंद्र नहीं हो सका स्थापित
गेहूं खरीद को लेकर जहां प्रशासन चिंता में हैं तो वहीं किसान काफी उम्मीद संजोए हुए हैं। यहां बता दें कि वास्तविक खरीद एक सप्ताह बाद लक्ष्य मिलते ही शुरू हो सकेगी। इसमें नमी और जौ की मिलावट को लेकर दोहन इस बार भी अन्य वर्षों की भांति हो सकता है। इसलिए किसानों को कटौती के नाम पर सजग रहने की जरूरत होगी। इस मामलें में भाकियू और बीकेडी ने भी इस बार कमर कस ली है और गेहूं खरीद के नाम किसी प्रकार की लूट न हो इसके लिए अभी से जागरूकता अभियान चलाने को कहा है।
किसान नेताओं को अंदेशा है कि इस बार फु ल वैल्यू कटौती के नाम पर खेल हो सकता है। इसके लिए मानक तय हो चुके हैं। अमर उजाला भी इस संबंध में मानकों की जानकारी किसानों को दे रहा है। इसलिए कटौती की किसी भी स्थिति में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत होगी। किसान बढ़ती लागत और मौसम की मार से पहले ही पीड़ित रहा है। इस बार भी मौसम ने अपना आक्रामक रुख दिखाकर गेहूं का दाना कमजोर कर दिया है। बावजूद इसके किसान फिर भी फसल हाथ लग जाने से उम्मीद लिए बैठा है।
ये है फुल वैल्यू कटौती
बदायूं। गेहूं में नमी के नाम पर या उसमें जौ आदि की मिलावट के नाम पर कटौती कर ली जाती है। इसमें होना तो चाहिए कि 12 प्रतिशत से कम नमी है, तो कोई कटौती न हो लेकिन 12 से 13 प्रतिशत नमी होने पर फुल वेल्यू 14 प्रतिशत कटौती कर ली जाती है। यानि प्रति क्विंटल एक किग्रा, 400 ग्राम कटौती। जौ की मिलावट मिट्टी की मिलावट के नाम पर भी ऐसे ही किसानों को हड़काकर कटौती कर ली जाती है। छलना लगाकर खरीद करने के बावजूद सीधे-साधे किसानों को बख्शा नहीं जाता।
थ्रेसिंग कर लाए गेहूं में नहीं होती नमी
बदायूं। यहां किसानों को यह जानना जरूरी है कि थ्रेसिंग करके लाए गेहूं में नमी नहीं होती है। अगर, नमी होगी तो थ्रेसिंग भी नहीं होगी। इसकी जानकारी किसान को होना चाहिए और कहीं कटौती की जा रही हो तो तत्काल इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों को बतानी चाहिए। अभी तक गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित नहीं हुआ है। क्रय एजेंसियां गुपचुप तरीके से गेहूं खरीद का खाका बना चुकी हैं। लक्ष्य आते ही अपनी खरीद एक साथ दिखा देंगी।
अब तक नहीं बना है कोई कंट्रोल रूम
बदायूं। किसानों को क्रय केंद्रों में क्रय एजेंसीज का दलालों की लूट से बचाने के लिए कंट्रोल रूम स्थापना भी अभी जिले में नहीं की गई है। सुदूर क्रय केंद्रों पर क्रय एजेंसीज मनमानी करती हैं। इन हालातों में किसान किससे शिकायत करे। इसके लिए कंट्रोल रूम बनना चाहिए। विगत वर्षों में कंट्रोल रूम बनते रहे हैं, लेकिन इस बार अभी कोई ऐसी घोषणा नहीं की गई है।
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गेहूं खरीद का लक्ष्य मिलते ही क्रय केंद्रों की सक्रियता और व्यवस्थाएं ठीक हो जाएंगी। कटौती भी मानक के अनुरूप होगी। अधिक समस्या होने पर गेहूं खरीदने से इंकार किया जा सकता है। बाकी सभी परिस्थितियों में गेहूं की खरीद होगी।
- आशीष सैनी, डीआरएमओ