बदायूं। पीलीभीत के जिला अस्पताल में पैरामेडिकल की छात्रा कशिश की बेरहमी से हत्या करने की घटना से सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था सवालों से घिर गई है। इस घटना के बाद बुधवार को बदायूं के राजकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, जिला महिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था की पड़ताल की गई तो सुरक्षा सिर्फ दावों तक सीमित दिखी। सरकारी अस्पतालों में सुरक्षाकर्मी तैनात जरूर मिले, लेकिन वे आने-जाने वालों को चेक नहीं कर रहे थे। ऐसी स्थिति में कोई भी वारदात हो सकती है।
जनपद के जिला अस्पताल में 14, जिला महिला अस्पताल में 21 और राजकीय मेडिकल कॉलेज में 67 सुरक्षा गार्ड की तैनाती है। वहीं मेडिकल कॉलेज में 90, जिला महिला अस्पताल में 30 और जिला अस्पताल में 35 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इन सभी की इमरजेंसी में रोजाना ढाई हजार के करीब मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। इनमें से कौन अपने साथ प्रतिबंधित हथियार ला रहा है, इसकी जांच परख के लिए किसी स्तर पर कोई चेकिंग नहीं होती है।
संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल के दौरान सरकारी अस्पतालों में वार्डाें में भी सुरक्षा व्यवस्था बदहाल मिली। राजकीय मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात थे, लेकिन कॉलेज में कौन आ जा रहा है। उनको इससे मतलब नहीं दिखा। वे किसी को चेक करना तो दूर, उनसे पूछताछ तक नहीं कर रहे थे। यही हाल इमरजेंसी वार्ड का था। यहां आने-जाने वाले लोगों से गार्ड कुछ भी पूछताछ नहीं करता नजर आया। शैक्षणिक भवन में कौन आ-जा रहा, उससे भी गार्ड अनजान दिखे।
इससे ज्यादा खराब हाल जिला अस्पताल में मिले। यहां पर मुख्य गेट पर किसी गार्ड की तैनाती नहीं मिली। हालांकि गार्ड कक्ष में एक गार्ड बैठे हुए थे, उन्हें कोई मतलब नहीं था कि इमरजेंसी में कौन आया और कौन गया। ऐसा तब है जबकि यहां पिछले दिनों इमरजेंसी में एक मृत महिला के कान के कुंडल निकल गए थे। उस दौरान भी इमरजेंसी में गार्ड तैनात नहीं मिला था।
हालांकि महिला अस्पताल में स्थिति में काफी सुधार दिखा। यहां सुरक्षा कर्मी के साथ-साथ पुलिस कर्मचारी भी तैनात मिले, जो लोगों से आने जाने का कारण पूछने के बाद ही भीतर जाने दे रहे थे।
सवालों के घेरे में नजर आई छात्र-छात्राओं की सुरक्षा
राजकीय मेडिकल कॉलेज में कहने को 67 सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था लचर नजर आई। वार्ड में लोग बेवजह घूमते नजर आ रहे थे। वहीं बॉय हॉस्टल से लेकर गर्ल्स हॉस्टल का भी यही हाल था। वहां पर तैनात सुरक्षा गार्ड किसी से कोई जानकारी नहीं ले रहा था। ऐसे में लोग आराम से आ-जा रहे थे। इससे छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सवालाें के घेरे में नजर आई।
कहां कितने सुरक्षा गार्ड
-जिला अस्पताल : 14
-जिला महिला अस्पताल : 21
-राजकीय मेडिकल कॉलेज : 67
कुल : 102 सुरक्षा गार्ड
सरकारी अस्पतालों में तैनात सुरक्षा गार्ड को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह ड्यूटी के दौरान अपनी-अपनी जगहों पर मौजूद रहें। अगर कोई सुरक्षा कर्मचारी नदारद मिलता है तो उससे जवाब मांगा जाएगा। उचित जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. विकास शर्मा, सीएमओ
मेडिल कॉलेज में जगह-जगह पर सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। साथ ही सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। सीएमएस से जानकारी करेंगे, अगर और भी गार्ड या सीसीटीवी कैमरे की जरूरत है तो गार्ड लगाए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरों की जरूरत है तो वह लगवाए जाएंगे। मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। - शिव कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
जिला महिला अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड, पुलिसकर्मी। संवाद
जिला महिला अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड, पुलिसकर्मी। संवाद
जिला महिला अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड, पुलिसकर्मी। संवाद