परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को दी जाने वाली किताबें पहले से ज्यादा आकर्षक होंगी। जानकारों की मानें तो कागज को इको फ्रेंडली रखते हुए चमकदार बनाया जाएगा। इससे बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि भी बढे़गी। साथ ही किताबों के प्रति आकर्षण भी बढे़गा। जिससे साक्षरता दर में भी इजाफा होगा।
गौरतलब है कि हर साल सर्व शिक्षा अभियान के तहत कक्षा एक से आठ तक के प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में पंजीकृत बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकेें दी जाती हैं, ताकि ग्रामीण अंचल के गरीब छात्र भी आसानी से शिक्षा ग्रहण कर सकें। जानकार बताते हैं कि उम्र के लिहाज से प्राय: देखा जाता है कि बच्चे किताबों की ओर ज्यादा आकर्षित नहीं हो पाते हैं और न ही किताबों का ढंग से रखरखाव करते हैं। इसे देखते हुए शासन ने इसमें परिवर्तन करने का विचार करते हुए इस सत्र से लागू करने का भी खाका तैयार किया है। इसके तहत किताबें पहले की अपेक्षा ज्यादा आकर्षित, चमकदार बनाया जाएगा। इको फ्रेंडली पन्ने लगे होंगे। इससे क्वालिटी तो सुधरेगी ही साथ ही बच्चों के अंदर किताबों के प्रति रूचि जाग्रत होगी। इससे वह पढ़ाई में भी मन लगाएंगे और रखरखाव भी बेहतर कर सकेंगे। बताते हैं कि इसके लिए हर साल स्कूलों में पंजीकृत छात्र संख्या भेजी जाती है। उसी के मुताबिक किताबें आवंटित की जाती है।
वर्जन-
इको फ्रेंडली पन्ने रखने, किताबों को पहले की अपेक्षा और आकर्षित बनाने के बारे में अभी सुना है। पूर्ण जानकारी की जा रही है।
-कृपा शंकर वर्मा, बीएसए।