बदायूं। जिले की मौजूदा बिजली व्यवस्था का ओवरलोड के कारण दम फूल रहा है। जिलेभर के 56 विद्युत उपकेंद्रों पर लगभग दो गुना भार है। इस वजह से जर्जर तार टूटकर गिर रहे हैं, जिनसे लोगों की जान जा रही है। जर्जर लाइनें बदलने और उपकेंद्रों की संख्या बढ़ाने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए 44 विद्युत उपकेंद्रों की और जरूरत है। इससे ओवरलोड भी रुकेगा और कटौती भी कम होगी।
विभाग के मुताबिक जिले में करीब 4,31,000 उपभोक्ता हैं, जबकि 2500 जगह बिजली चोरी की जा रही है। ऐसे 56 विद्युत उपकेंद्र ओवरलोड रहे हैं। एक-एक फीडर पर कई-कई गांव का भार है। इससे बिजली आपूर्ति भी लगातार नहीं मिल रही है। बिजली की लाइनें जर्जर हैं। वर्षों से ये लाइनें नहीं बदली गई हैं। जैसे-तैसे जोड़-तोड़कर काम चलाया जा रहा है।
उपभोक्ताओं की संख्या के हिसाब से जिले में उपकेंद्रों की संख्या 100 होनी चाहिए। इनकी संख्या बढ़ेगी तो कई समस्याओं से भी निजात मिलेगी। एक तो जिले में ओवरलोड़ की समस्या नहीं होगी, दूसरी बिजली कटौती पर भी लगभग विराम लग जाएगा। अगर 44 उपकेंद्र नहीं बनाए जा सकते तो जहां सबसे ज्यादा समस्या है, वहां उपकेंद्र बनाया जाना बहुत जरूरी है।
कादरचौक इलाके में प्रतिदिन खराब होती है बिजली
कादरचौक इलाके में तीन विद्युत उपकेंद्र हैं। इनमें कादरचौक, असरासी और भूड़ा भदरौल शामिल हैं। इस समय तीनों ही उपकेंद्र ओवरलोड चल रहे हैं। भूड़ा भदरौल का ट्रांसफॉर्मर काफी समय से फुंका हुआ चल रहा था। यहां के लिए नया ट्रांसफॉर्मर भी आ गया, लेकिन अभी उसको बदला नहीं गया है।
गर्म होकर टूट जाती हैं लाइनें
बिजली निगम के अधिकारियों के अनुसार ओवरलोडिंग की वजह से ही लाइनें गर्म होकर टूट जाती हैं। ओवरलोड की वजह से पहले लाइनें गर्म हो जाती हैं। बाद में गर्म होकर टूट जाती हैं। लाइनें टूटना भी तभी बंद होंगी, जब शहर में ओवरलोडिंग बंद होगी।
जिले में ओवरलोडिंग की समस्या सबसे ज्यादा है। इससे आपूर्ति भी बाधित हो रही है। जिले को कम से कम 100 विद्युत उपकेंद्र की जरूरत है लेकिन यहां केवल 56 उपकेंद्र ही हैं। इससे कई समस्याएं हो रहीं हैं। उपकेंद्रों की संख्या बढ़े तो इन समस्याओं का समाधान हो। -अखिलेश कुमार, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम