गंगा दशहरा पर गंगा स्नान करते समय एक महिला, दो बालिका और एक बालक गंगा में डूब गए। इनमें दो बालिकाओं को जीवित बचा लिया गया। महिला का शव मिला है और एक बालिका अब तक लापता है। काफी कोशिश के बाद भी गोताखोर उसे खोज नहीं सके। हादसे सहसवान के टोंटपुर करसरी और जरीफनगर के साधुमढ़ी घाट पर हुए।
सहसवान। कोतवाली क्षेत्र के गांव ठैडा की मडैया निवासी कुसुमा देवी (30) पत्नी लेखराज अपनी सास कांती देवी और बच्चों के साथ गुरुवार को टोंटपुर करसरी घाट पर गंगा स्नान को गई थीं। कुसुमा ने बच्चों को स्नान कराने के बाद गंगा किनारे बैठा दिया। बाद में वह अपनी सास के साथ स्नान करने गईं। गंगा में आगे बढ़ते ही सास-बहू डूबने लगीं। दोनों को डूबता देख वहां मौजूद ग्रामीणों ने इनको बचाने की कोशिश की। ग्रामीणों की मदद से गोताखोर कांती देवी को जीवित निकालने में कामयाब हो गए, लेकिन कुसुमा का पता नहीं लगा। कई घंटे की कोशिश के बाद कुसुमा का शव बाढ़ खंड की तिपाई में फंसी हुई मिली। खबर मिलने पर कुसुमा के परिवार वाले भी पहुंच गए। उन्होंने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंच कर जानकारी ली।
जरीफनगर। थाना क्षेत्र के साधुमढ़ी घाट पर गंगा स्नान करते हुए दो बालिका और एक बालक गंगा में डूब गया। इनमें एक बालिका और एक बालक को बचा लिया गया। कई घंटे की मेहनत के बावजूद गोताखोर एक बालिका को नहीं ढूंढ सके।
थाना क्षेत्र के गांव चिरवारा से कुछ ही देरी पर गंगा का साधुमढ़ी घाट है। गंगा दशहरा पर गांव के सत्यपाल की पुत्री नीलम (12), श्रीपाल की पुत्री सत्यवती (11) और फूल सिंह का पुत्र रूपेश (10) साधुमढ़ी घाट पर गंगा स्नान करने गए थे। यह तीनों खेल-खेल में गहराई में पहुंच गए और डूबने लगे। आसपास स्नान कर रहे लोगों की मदद से गोताखोरों ने रूपेश और नीलम को बचा लिया। सत्यवती का पता नहीं लगा। कई घंटे गोताखोरों ने उसकी तलाश की लेकिन कामयाबी नहीं मिली।
चार बच्चों के सिर से उठा मां का साया
सहसवान। कुसुमा के चार बच्चे बेटी जयवंती, (10) सलौनी (8), डौली (6) कीर्ती (4) और पुत्र अरविन्द (2) हैं। चारो बच्चों के सर से मां का साया उठ गया है। घटना के बाद कुसुमा का पूरा परिवार गमजदा है। पति लेखराज भी बेसुध है। चारो बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है।