फर्स्ट रिफरल यूनिट की चिकित्सकीय सुविधा से सुसज्जित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सोमवार का अजीब नजारा देखने को मिला। मरीजों की संख्या अन्य दिनों के मुकाबले कोई खास कम नहीं थी, लेकिन चिकित्सधीक्षक क्या परमानेंट डॉक्टर, कोई भी केबिन में नहीं दिखा। इकलौते डेंटिस्ट कार्तिकेय ने फिजीशियन की भूमिका निभाकर तीन सौ से अधिक मरीजों के इलाज की औपचारिकता पूरी कर दी।
एफआरयू सुविधा वाले अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ से लेकर सर्जन और लेडी डॉक्टर की ड्यूटी का फरमान सेहत महकमा के अफसर देते रहे हैं, लेकिन असल तस्वीर क्या है, यह जानने का अफसर भी प्रयास नहीं करते। यहां भी विशेषज्ञ चार डॉक्टर तैनात हैं। सोमवार को चिकित्साधीक्षक विश्वास अग्रवाल, डॉ. निरंजन सिंह, डॉ. राजकुमार गंगवार और डॉ. वीरेश कुमार में से एक भी चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं दिखा तो मरीजों ने कानाफूंसी शुरू कर दी। डेंटिस्ट कार्तिकेय के केबिन में मरीजों की भीड़ देख पता लगा कि इकलौते वही ड्यूटी पर हैं।
डॉ. कार्तिकेय ने सभी बीमारियों के मरीजों तो रमा मनराल ने महिलाओं के पर्चों पर दवाएं लिखने की कमान संभाल रखी। कोई मरीज निराश होकर घर नहीं लौटा। भले ही कार्तिकेय ने पुराने पर्चों पर दवाएं रिपीट कर दी हों। बता दें कि अस्पताल में रोजाना दो-ढ़ाई सौ नए पर्चे बनते हैं। नियमित पहुंचने वाले पुराने मरीजों की संख्या भी एक सौ के आसपास बनी रहती है। मरीजों में राजपाल की मानें तो वह तीन बार दवा लेने अस्पताल पहुंचा लेकिन हर बार ही डॉक्टर बदलना पड़ा।
लेडी डॉक्टर दो, दोनों संविदा पर
उझानी। एक समय था जब यहां सीएचसी पर लेडी डॉक्टरों की भरमार हुआ करती था, लेकिन पिछले पांच-छह साल से परमानेंट लेडी डॉक्टर की कमी रही है। हाल ही में कृति सिंह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति हासिल कर चुकी हैं। इसके बाद से संविदा पर तैनात हिना सबदर और रमा मनराल के भरोसे ही महिलाओं के इलाज और जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव कराने की औपचारिकता पूरी की जाती रही है। मनराल फील्ड तो सबदर अस्पताल में ड्यूटी पर रहती है, लेकिन सबदर भी पांच दिन के अवकाश पर बताई गई हैं।