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लड़े खूब लेकिन जीत न सके

Sat, 11 Mar 2017 11:13 PM IST
बदायूं।
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result - फोटो : amar ujala
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कैप्टन अर्जुन ने कांग्रेस-सपा गठबंधन को डुबोया
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सपा के बागी बनकर दातागंज विधानसभा में लोकदल से चुनाव मैदान में उतरे कैप्टन अर्जुन प्रताप सिंह ने कांग्रेस-सपा गठबंधन के अरमानों पर पानी फेर दिया। अप्रत्याशित रूप से 39029 वोट हासिल करने के बाद भी अर्जुन न तो खुद जीत सके, न ही उन्होंने कांग्रेस प्रयाशी पूर्व विधायक प्रेमपाल सिंह यादव को जीतने दिया। हैरत की बात यह है कि प्रेमपाल सिंह यादव कांग्रेस-सपा के गठबंधन से प्रत्याशी होने के बाद भी कैप्टन अर्जुन से कम ही वोट हासिल कर पाए। इससे सपा को दातागंज सीट पर अर्जुन का टिकट काटने पर अफसोस हो सकता है। असल में, दातागंज सीट पर यादव वोटर दोनों में बंट गए। इस बंटवारे की वजह से ही प्रेमपाल सिंह को मुस्लिम वोटरों का साथ भी पूरी तरह से नहीं मिल पाया। जबकि अर्जुन सजातीय यादव मतदाताओं के बीच सपा से टिकट कटने की सहानुभति वोटर पाने में कामयाब रहे। सपा के बजाय कांग्रेस से चुनाव मैदान में आना भी प्रेमपाल का कमजोर पहलू बन गया। इससे वह पिछले चुनाव जितने 58235 हजार वोट भी हासिल नहीं कर सके। इस चुनाव में उनको 32243 वोट ही मिल सके।
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डॉ. शैलेष की बगावत भी बेअसर रही
बदायूं। सही बात यह है कि डॉ. शैलेष पाठक को साल 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में मिले लगभग 50-50 हजार से ज्यादा वोटों के आधार पर ही कांग्रेस ने दातागंज सीट सपा से गठबंधन में अपने पास रखी और प्रेमपाल सिंह सपा छोड़ने के बाद कांग्रेस में शामिल होकर उससे टिकट हासिल करने में कामयाब हो गए लेकिन वोटरों ने उनका साथ नहीं दिया। भाजपा के बागी बनकर डॉ. शैलेष ने पीस पार्टी से चुनाव मैदान में उतरकर अपने कद को कांग्रेस के इतर आजमाया लेकिन वह 11 हजार वोटों तक ही सिमट गए। जाहिर है कि कांग्रेस के इतर चुनाव लड़कर प्रभाव दिखाने की उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो सकी और भाजपा को बागी बनकर वह हरा नहीं सके। हालांकि माना जा रहा था कि वह भाजपा को नुकसान पहुंचाएं।
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लहर में थम गए रामसेवक पटेल
बदायूं। सदर सीट पर भाजपा के बागी बनकर शिवसेना से चुनाव मैदान में उतरे रामसेवक पटेल से महेश चंद्र गुप्ता को डर था। पटेल की वोटरों पर पकड़ और उनके सियासी कद के प्रभाव के परिणामस्वरूप सियासी हलके में अनुमान लगाया जा रहा था कि अगर कहीं उनको ज्यादा वोट मिल गए तो भाजपा सदर से हार सकती है। मतदान से एक दिन पहले तक इसकी अटकलें भी खूब लग रही थीं लेकिन शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा के सबब वोटरों का मन काफी हद तक बदल गया। मतदान वाले दिन बहुत सारे वोटरों ने मन बदल लिया और वह भाजपा के साथ आकर खड़े हो गए। नतीजतन, रामसेवक को 15 हजार वोटरों का आंकड़ा न छू सके। उनको 14576 मिले।
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सहसवान में रापद की उमलेश पर खूब बरसे वोट
बदायूं। सहसवान से रापद की प्रत्याशी उमलेश यादव को 57522 वोट मिलने से उनके प्रभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। हालांकि उनको शुरू से ही मुख्य मुकाबले में माना जा रहा था। मतदान के बाद सियासी खेमे में उनके जीत के कयास भी लगने लगे थे। भाजपा से जितेंद्र यादव का टिकट काटे जाने के बाद जिस तरह से आनन-फानन में उमलेश ने अपना नामांकन कराया, उसके बाद से ही उनको जितेंद्र यादव का सहानुभूति वोट मिलने का अनुमान लगाया जाने लगा था। यह भी माना जा रहा था कि सहसवान के यादव मतदाता भी बड़ी तादाद में उनका साथ देंगे। सजातीय वोटों का सहारा उन्हें मिला भी लेकिन जीत का जादुई आंकड़ा हासिल करने से वह चूक गईं।
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