ऐसे तो नवंबर में चीनी मिलों में शुरू नहीं होगी पेराई
140 रुपये क्विंटल गन्ना बेचने को मजबूर हैं किसान
जिले में 20,733 हेक्टेयर में गन्ने की फसल बोई गई है। यह गन्ना जिले की दो चीनी मिलों सहित आसपास क्षेत्रों की पांच अन्य मिलों में भेजा जाता है। इस बार प्रदेश स्तर से चीनी मिलों को गन्ना क्षेत्रों का आवंटन ही नहीं किया गया है, तो मिलों के समय से चालू होने की उम्मीद करना भी बेमानी है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक गन्ने एरिया आवंटित होने और चीनी मिलों को इसे क्रियान्वित करने में दो सप्ताह लग जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक चीनी मिलों में दिसंबर ही में गन्ना पेराई शुरू हो पाएगी, जबकि मिलों में पेराई 15 नवंबर तक शुरू करने के निर्देश दिए गए थे।
जिले में करीब चार सौ कोल्हू संचालित हो रहे हैं, जिनमें भारी मात्रा में गन्ने की पेराई की जा रही है। गन्ना किसान अपने पसीने की कमाई को कोल्हुओं पर आधे से कम कीमत पर बेच रहा है, सिर्फ इसलिए कि उसे मिलों में जल्द पेराई शुरू होती नजर नहीं आ रही है। पेराई शुरू होने के बाद भुगतान की चिंता भी किसानों को मिलों से दूर कर रही है। खेत को खाली करके दूसरी फसल बोने की तैयारी और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किसान रोजाना सैकड़ों क्विंटल गन्ने को बेच रहा है। जिला गन्ना अधिकारी, डीके सैनी ने बताया कि नवंबर के अंत तक चीनी मिलों में गन्ना पेराई शुरू होने की उम्मीद है। एक सप्ताह के अंदर शासन से गन्ना एरिया रिजर्वेशन आने की उम्मीद है। एरिया रिजर्वेशन मिलने के एक सप्ताह के अंदर चीनी मिलों पेराई शुरू हो जाएगी। गन्ना किसान कोल्हू या क्रेशर पर गन्ना न बेचे। मिलों में जल्द गन्ना खरीद शुरू कर दी जाएगी।