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खाद्य सुरक्षा प्रशासन  की मॉनीटरिंग फेल

Tue, 03 May 2016 11:52 PM IST
बदायूं, ब्यूरो
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खाद्य सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला
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खाद्य पदार्थ बेचने वालों की अब कैसे को पाएगी मॉनीटरिंग
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ठेले-खोमचे वालों और छोटे दुकानदारों ने रजिस्ट्रेशन के बाद नहीं कराया रिन्यूृअल
 ठेले-खोमचे वालों पर बिक रही खाद्य सामग्री कहीं लोगों को बीमार न बना दे। इनकी मॉनीटरिंग को खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन की नई व्यवस्था शुरू की थी। लेकिन, यह क्या इन लोगों ने खाद्य सुरक्षा प्रशासन की मंशा पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। किसी ठेले-खोमचे वाले या छोटे दुकानदार ने रजिस्ट्रेशन का रिन्यूअल नहीं कराया। रजिस्ट्रेशन होते रहे लेकिन रिन्यूअल नहीं हुए । इसलिए रजिस्ट्रेशन की संख्या वहीं के वहीं, कोई 1200 के इर्दगिर्द ही घूमती रह गई है।   
लोगों के स्वास्थ्य के प्रति चिंता दर्शा रहे खाद्य सुरक्षा प्रशासन की मंशा पूरी तरह से फेल हो गई है। गत वर्ष फूड लाइसेंस एंड रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एफएसआरएस) शुरू किया गया था। पिछले वर्षों में करीब 1200 रजिस्ट्रेशन भी हुए। आगे रजिस्ट्रेशन चलते रहे लेकिन पिछले उन किसी ठेले-खोमचे, फड़ वाले और छोटे दुकानदारों ने रिन्यूअल नहीं कराया। शुरू में तो खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने कैंप लगाकर रजिस्ट्रेशन को अभियान भी चलाया था। रजिस्ट्रेशन तो होते रहे लेकिन एक भी रिन्यूअल आज तक नहीं हुआ। जो संख्या शुरू में रजिस्ट्रेशन की थी वहीं संख्या बनी हुई है। 
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ऑनलाइन व्यवस्था में रिन्यूअल आड़े आया 
जानकारों की माने तो रजिस्ट्रेशन से लेकर रिन्यूअल तक ऑनलाइन रहा। इसके लिए उन्हें फोटो और वोटर आईडी, आधार कार्ड और मोबाइल नंबर देना था। मात्र 100 रुपये में सालभर के लिए रजिस्ट्रेशन हो रहा है। रिन्यूअल की भी इतनी ही फीस है। कुछ छोटे दुकानदार रजिस्ट्रेशन से कार्रवाई के खौफ में थे तो अधिकांश ने ऑनलाइन सिस्टम के झंझट के करण रिन्यूअल नहीं कराया। 
मॉनीटरिंग के लिए जरूरी था रजिस्ट्रेशन   
खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने एफएलआरएस इसलिए शुरू की कि जो ठेले-खोमचे वाले और छोटे दुकानदार खाद्य पदार्थ बेचते हैं उनके खाद्य पदार्थ मिलावटी होने या खराब होने के कारण कहीं मानव स्वास्थ्य को कोई नुकसान न पहुंचा दें। इनकी मॉनीटरिंग होती रहती तो इनको खौफ भी बना रहता। यहीं नहीं, शहरों और कस्बों में ऐसे छोटे दुकानदारों की गणना भी रहती। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग की मंशा पूरी तरह फेल हो गई है। 
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अबतक एक भी ऐसे दुकनदार ने रिन्यूअल नहीं कराया है। कम पढ़े लिखा होना भी इसकी एक वजह रही है। रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं लेकिन रिन्यूअल नहीं हो रहे हैं। इससे पिछले रजिस्ट्रेशन खत्म होते जा रहे हैं। 
- संजय शर्मा, अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा प्रशासन
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