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बढ़ने लगा कोहरा, थमने लगी वाहनों की रफ्तार  

Fri, 02 Dec 2016 11:14 PM IST
ब्यूरो/बदायूं
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कोहरा
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सीजन के पहले घने कोहरे ने गुरुवार को वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। दृश्यता में गिरावटआई। कई स्थानों पर सड़क हादसे भी हुए। मौसम वैज्ञानिक डॉ. आलोक सागर गौतम के मुताबिक अगले दो दिन तक मौसम में बदलाव की उम्मीद कम है।  
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सर्दियों के सीजन में कोहरे की वजह से हर साल दर्जनों लोगों की सड़क हादसों में जान चली जाती है। दिसंबर में कोहरे का सीजन शुरू हो जाता है। इससे पहले उप संभागीय परिवहन विभाग नवंबर माह को यातायात माह के तौर पर मनाता है। इस दौरान वाहनों में रिफ्लेक्टर लगाने के साथ जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। इसके बावजूद कोहरे के दौरान हादसों पर ब्रेक नहीं लग पाता। हादसे रोकने के लिए परिवहन विभाग के पास जरूरी संसाधनों का भी अभाव है। वजीरगंज, फैजगंज बेहटा और उझानी में सड़क हादसे कोहरे की वजह से ही हुए। इनमें दो लोगों की जान गई और कई लोग जख्मी हो गए। 
कोहरे में विशेष प्रकार की लाइट की जरूरत
एआरटीओ अमिताभ राय का कहना है कि नवंबर में यातायात माह के दौरान अधिकांश ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और भारी वाहनों के साथ सवारियां ढोने वाले वाहनों में भी रिफ्लेक्टर लगवाए गए हैं। पूरे जिले में अभियान चलाकर वाहन चालकों का नेत्र परीक्षण भी कराया गया। जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। हादसों से बचने के लिए जरूरी है कि यातायात नियमों का पालन करें। कोहरे में विशेष सावधानी के साथ वाहनों में विशेष प्रकार की लाइट लगाने की जरूरत है।
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सरसों गेहूं को फायदा 
मौसम विज्ञानी डॉ. आलोक सागर गौतम के मुताबिक अगले दो दिनों तक सुबह और रात के वक्त कोहरा बना रह सकता है। अधिकतम तापमान 25 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 13-14 डिग्री के आसपास बने रहने की संभावना है। कोहरा गिरने से सरसों और गेहूं की फसल को फायदा होगा। सरसों की फसल से खरपतवार निकालना जरूरी है। सब्जियों के लिए मौसम व तापमान में गिरावट को देखते हुए आगामी 10 से 15 दिनों के बाद टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी के पौध की रोपाई का उचित समय होगा।
स्वास्थ्य की देखभाल भी जरूरी
सर्दियों के सीजन में कोहरे के दौरान सबसे ज्यादा बुजुर्गों के स्वास्थ्य को खतरा रहता है। अस्थमा के रोगियों को खास ध्यान रखने की जरूरत है। सर्दियों में एलर्जी के तत्व कोहरे की वजह से आसपास ही रहते हैं। हवा में उढ़ते नहीं हैं। ऐसे में इनसे अस्थमा के मरीजों और बुजुर्गों की तकलीफ  बढ़ जाती है। फिजीशियन डॉ. हरपाल सिंह के मुताबिक सर्दियों में अगर शरीर का ताप 34-35 डिग्री से नीचे चला जाए तो हाइपोथर्मिया की दिक्कत बढ़ जाती है। इसमें हाथ-पैर ठंडे हो होने के साथ ब्ल्ड प्रेशर कम हो जाता है। गर्म चीजों का सेवन करें। जहां तक संभव को तेज सर्द हवाओं से खुद को बचा कर रखें। ड्राई स्किन को नमी न मिले तो त्वचा में खुजली और लाल चकत्ते भी होने की संभावना रहती है। पानी खूब पिएं, पालक, मेथी, बथुआ आदि सब्जियों का सेवन करें। 
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