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कई गांवों में फिर घुसा बाढ़ का पानी, कई स्थानों पर कटान भी

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उफान के बीच उसहैत में तटबंध के पास तक पहुंचीं गंगा। संवाद - फोटो : BADAUN
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बदायूं। गंगा ने बुधवार को एक बार फिर खतरे के निशान को पार कर दिया। गंगा में उफान के साथ तटवर्ती कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है तो कई स्थानों पर कटान भी हो रहा है। उसहैत के तटवर्ती असमया रफतपुर और अहमदनगर बछौरा गांवों पर संकट मंडरा रहा है। रैपुरा, कमलैयापुर को भी बाढ़ के पानी ने घेर लिया है।
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गंगा में बुधवार को नरौरा बैराज से 54104 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बिजनौर से 42918 और हरिद्वार से 64299 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। मंगलवार को मीटरगेज पर गंगा का जलस्तर 161.44 मीटर था जो बुधवार को बढ़कर 162.94 तक पहुंच गया। मीटरगेज पर चेतावनी का निशान 161 और खतरे का निशान 162 मीटर पर है। करीब 15 दिन से गंगा के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव आ रहा है। इस कारण कटान भी हो रहा है। बाढ़ खंड की ओर से कटान वाले स्थानों पर इसे रोकने के प्रबंध किए जा रहे हैं। गंगा-महावा, उसहैत और उसावां तटबंधों पर हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। यहां कटान भी हो रहा है। ऐसे में तटबंधों की निगरानी के साथ कटान वाले स्थानों पर कटान रोकने के प्रयास हो रहे हैं।
दातागंज तहसील क्षेत्र के अहमदनगर बछौरा, असमया रफतपुर गांवों के अलावा यहां ठकुरी नगला, कदम नगला, जटा, बेहटी, भखरी, कमलू नगला, चेतराम नगला, दियूरी नगला पर भी खतरा मंडरा रहा है। सहसवान तहसील के तटवर्ती टोटपुर करसरी, भकरौलिया, परशुराम नगला, नगला वीर सहाय, वरन नगला, तौफी नगला गांवों को बाढ़ ने घेर लिया है। यहां भी कटान हो रहा है।
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जलस्तर में आज फिर होगा इजाफा
बाढ़ खंड के सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार को गंगा के जलस्तर में और भी इजाफा होगा। दरअसल, बुधवार को हरिद्वार से गंगा में 64 हजार क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया है। इसके साथ ही पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश भी शुरू हो गई है। हरिद्वार से छोड़ा गया पानी चौबीस घंटे में कछला तक पहुंच जाएगा। आने वाले दिनों में नरौरा बैराज से वाटर डिस्चार्ज और बढ़ेगा। ऐसे में तटवर्ती गांवों के लिए लगातार खतरा बना हुआ है।
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बुधवार को मीटरगेज पर गंगा ने खतरे के निशान को पार कर दिया है। बृहस्पतिवार को जलस्तर में कुछ और इजाफा होने का अनुमान है। जलस्तर बढ़ने के कारण तटवर्ती 20 से ज्यादा गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। जिन स्थानों पर कटान हो रहा है वहां कटान रोकने के सभी प्रबंध किए जा रहे हैं।
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-नेशपाल सिंह, सहायक अभियंता बाढ़ खंड
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